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अब बदली-बदली नजर आएंगी पाठशालाएं

7 वर्ष पहले
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जल्दी ही प्रदेश के स्कूलों की सूरत बदली-बदली नजर आएगी। प्रदेश की तमाम सरकारी स्कूलों में होने वाले विकास कार्यों में अब उस क्षेत्र में स्थापित निजी कंपनियों का पैसा भी लगेगा। निजी कंपनियां यह पैसा अपने काॅरपोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी मद में जारी करेंगी। हाल ही मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय किया गया और इस संबंध में आदेश जारी करते हुए शिक्षा विभाग को स्कूलों के नाम वहां की जरूरतों के मुताबिक प्लानिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। कंपनियां सीएसआर के बजट से अन्य विभागों के साथ शिक्षा विभाग के प्रोजेक्ट्स भी अपने हाथ में लेंगी। निजी कंपनियों की ओर से जारी होने वाला यह पैसा ऐसे क्षेत्रों में परियोजनाओं गतिविधियों के लिए दिया जाएगा, जहां राज्य या केंद्र सरकार की ओर से किसी भी स्कीम में राशि नहीं दी जाती है या मिलने वाली राशि पर्याप्त नहीं है।

ताकिस्कूल छोड़ें बच्चे

सरकारने निर्देश दिए हैं कि परियोजना की प्लानिंग करते समय उन तमाम चीजों का उल्लेख करें जिससे ड्रॉप आउट दर कम हो और बच्चे स्कूलों में ठहरें। इसके लिए निर्माण कार्यों के साथ-साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम, कंप्यूटर, लैपटॉप, फर्नीचर या ऐसे उपकरण जिससे नामांकन बढ़ाया जा सके, उन्हें भी शामिल किया जाए।

कंपनियोंके लिए है कानून में प्रावधान

कंपनीएक्ट में प्रावधान है कि कंपनियां अपने सामाजिक उत्तरदायित्वों का निर्वहन करेंगी और इसके लिए वे अपने वार्षिक लाभ का 2 फीसदी बजट विभिन्न विकास कार्यों के लिए आरक्षित रखेंगी।