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सैटेलाइट हॉस्पिटल में बिना विशेषज्ञ 24 घंटे सेवा
50 की जगह मात्र सात बैड
अलवर. काला कुआं स्थित राजकीय सैटेलाइट हॉस्पिटल।
सैटेलाइट अस्पताल में 50 बैड स्वीकृत हैं, लेकिन फिलहाल यहां एक वार्ड में मात्र सात बैड ही लगे हुए हैं। बैड खरीदने के लिए दो साल बाद भी बजट नहीं आया है। अगर बजट भी मंजूर हो जाए और बैड भी खरीद लिए जाएं तो अस्पताल में बैड लगाने के लिए पर्याप्त स्थान भी नहीं है। अभी मात्र तीस बैड की ही अस्पताल में जगह है।
^फिलहाल स्टाफ और संसाधनों की कमी है। लेकिन सैटेलाइट अस्पताल की शुरूआत अच्छी है। चिकित्सा स्टाफ के लिए शहर विधायक से साेमवार को मिलेंगे। अस्पताल में राउंड क्लाक ड्यूटी के लिए तीन और डॉक्टर की तत्काल आवश्यकता है। इनमें महिला रोग और शिशु रोग विशेषज्ञ भी मांगा जाएगा। अस्पताल की व्यवस्थाएं सुचारू बनाए रखने के लिए सीएमएचओ और राजीव गांधी अस्पताल के पीएमओ से भी आग्रह किया जाएगा। फिलहाल डाक्टर ऑन काॅल ही उपलब्ध संभव है। डॉ.जीएस राठौड़, कार्यवाहकपीएमओ सैटेलाइट अस्पताल अलवर
भास्कर न्यूज | अलवर
यदिआपका कोई अपना गंभीर बीमार हो जाए तो सैटेलाइट अस्पताल जाने से पहले डॉक्टर की उपलब्धता जान लें। खासकर विशेषज्ञ की। ऐसा करने पर रात के समय अधिक परेशानी हो सकती है। साथ ही मरीज की जान को संकट भी बढ़ सकता है। हाल ही में सैटेलाइट अस्पताल को 24 घंटे तो संचालित कर दिया। लेकिन विशेषज्ञों के बिना। संसाधनों तक में सुधार नहीं हो सका है। हालात ये हैं कि पूरे अस्पताल में एक भी विशेषज्ञ मौजूद नहीं हैं। इस अस्पताल में पांच पद विशेषज्ञों के हैं, जिनमें से तीन खाली हैं। शेष दो विशेषज्ञों में से पीएमओ डॉ. प्रमोद माथुर मेडिकल लीव पर हैं तो नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश गेरा की ड्यूटी राजीव गांधी अस्पताल में डेपुटेशन पर है। इसके अलावा अस्पताल में 6 डॉक्टर और हैं, जिनमें मेडिकल ऑफिसर डॉ. इंद्रा बालयान भी डेपुटेशन पर राजीव गांधी अस्पताल में कार्यरत हैं। शेष डॉक्टर की व्यस्तता दिन में अधिक रहती है। इन्हीं में से किसी एक की ड्यूटी रात को लगाई जाती है। दिन के साथ रात की ड्यूटी अस्पताल में रहकर देना असंभव है। शेषपेज |16
परिणामस्वरूपरात को कोई मरीज अस्पताल पहुंचता है तो डाक्टर को घर से बुलाना पड़ेगा। लेकिन अस्पताल के पास डाक्टर को बुलाने की व्यवस्था ही नहीं है। कारण, चालक का होना। इसके चलते एंबुलेंस का संचालन भी नहीं हो पा रहा है।