- Hindi News
- जोहड़ खुदाई में करोड़ों खर्च िफर भी नहीं भरता पानी
जोहड़ खुदाई में करोड़ों खर्च िफर भी नहीं भरता पानी
योजना का लक्ष्य ग्रामीणों को रोजगार देना
भास्कर न्यूज | बहरोड़ ग्रामीण
सरकारद्वारा नरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में जोहड़ खुदाई के कार्यों में करोड़ों रुपए खर्च किए गए। इसके बावजूद इसका लाभ नहीं लोगाें को नहीं मिल पा रहा है। लोगों ने निकाली गई मिट्टी को जोहड़ों में डालकर समतल कर अतिक्रमण कर लिया है। अतिक्रमण होने से जोहड़ में पानी आने का मार्ग बंद हो गया है। इससे जोहड़ में जल संग्रहण की उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आती है।
कहांकितना खर्च
क्षेत्रकी पंचायत समिति में 29 ग्राम पंचायतें है। जिनमें 22 ग्राम पंचायतों में सत्र 2008-09 में नरेगा योजना के तहत 30 जोहड़ों की खुदाई कर एक करोड़ 25 लाख 6138 रुपये खर्च किए गए। इनमें सबसे अधिक खोहर ग्राम पंचायत में चार जोहड़ों की खुदाई की गई। शेरपुर में एक जोहड़ की खुदाई पर 16 लाख 90 हजार 312 रुपये खर्च किए गए। वर्ष 2009-10 में जोहड़ खुदाई का कार्य नहीं हुआ। वर्ष 2010-11 में जागूवास में 8221 रुपये, नांगलखोड़िया में 2 लाख 386 रुपए, 2011-12 में जागूवास में 2 लाख 716 रुपए, नांगलखोड़िया में 3 लाख 308 रुपए, वर्ष 2012-13 में कारोड़ा में 5 लाख 3329 रुपए, नांगलखोड़िया में 3 लाख 7627 रुपए तथा वर्ष 2013-14 में 40 हजार रुपए, जटगांवड़ा में 6 लाख, रामसिंहपुरा में 3 लाख 4007 तथा नांगलखोड़िया में एक लाख 8235 रुपए जोहड़ खुदाई पर खर्च किए गए।
बहरोड़ ग्रामीण. पानी नहीं आने से सूखा जोहड़।
कार्यवाहक विकास अधिकारी सुनील कुमार मंगल का कहना है कि जोहड़ के चयन को लेकर कोई विशेष नियम नहीं है। सरकार का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को नरेगा में रोजगार उपलब्ध करवाना रहा।
एसडीएम विनय कुमार नगायच का कहना है कि नरेगा योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध करवाना है। अगर इन पर अतिक्रमण किया गया है तो जांच कराई जाएगी।
सरकार द्वारा जोहड़ों की भूमि पर अतिक्रमण करने वालों पर कार्रवाई नहीं करना यह दर्शाता है कि इन जोहड़ों की खुदाई का पानी की आवक से कोई लेना-देना नहीं है। इस योजना का लक्ष्य सिर्फ ग्रामीणों को रोजगार देना मात्र रहा है। अब तक इन जोहड़ों में पानी की आवक हुई है और ही यह जोहड़ आमजन के विकास में सहायक बन रहे हैं। इसके विपरीत लोगों ने इन जोहड़ों पर पक्के निर्माण तक कर अतिक्रमण कर लिए है।