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स्वाइन फ्लू संदिग्ध की मौत

6 वर्ष पहले
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अलवर। राजीव गांधी अस्पताल की छोटी-सी भूल ने सोमवार को काफी मशक्कत करा दी। यहां स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड से डिस्चार्ज होने के बाद रोगी महिला की पॉजीटिव रिपोर्ट आई तो उसके पते को लेकर अस्पताल प्रशासन के हाथ-पैर फूल गए।
क्योंकि रोगी के संपर्क में आए लोगों को टेमीफ्लू वितरण किया जाना जरूरी था। अस्पताल के रिकॉर्ड में भौती देवी का पता वार्ड 21 दर्ज किया गया और यह वार्ड संख्या भी पुरानी थी। इसने समस्या और बढ़ा दी। महिला के बीपीएल श्रेणी की होने के कारण रिकॉर्ड की छानबीन इसी आधार पर की गई।
काफी मशक्कत के बाद महिला का पता दीवानजी का बाग निकला। पहले कर्मचारी भेजकर स्थान और रोगी का सत्यापन कराया गया। इसके बाद चिकित्सा दल ने मौके पर पहुंचकर टेमीफ्लू वितरण की।

आइसोलेशन वार्ड फुल, हड्डी वार्ड में भर्ती किए रोगी

अस्पताल में राेगियों की संख्या बढ़ रही है। खासी-जुकाम के रोगी बड़ी संख्या में हैं। स्वाइन फ्लू के संदिग्ध रोगियों के बढ़ने के साथ ही नया 18 बैड का आइसोलेशन वार्ड सोमवार को फुल हो गया। इस कारण हड्डी वार्ड में रोगियों को भर्ती करना शुरू किया गया। दोपहर में करीब 23 रोगी भर्ती थे।

भूल गए 24 घंटे सैंपल कलेक्शन के निर्देश

निदेशालय की ओर से स्वाइन फ्लू के संदिग्ध रोगियों के 24 घंटे सैंपल कलेक्शन के निर्देश दिए गए थे। अस्पताल प्रशासन इस निर्देश को भूल गया। यहां रात और दिन में भर्ती रोगियों की सैंपलिंग सुबह नौ से दोपहर एक बजे तक ही की जाती है। सोमवार को भी दीनदयाल का सैंपल नहीं लेने का भी यही कारण रहा।

हल्का बुखार, खांसी, गले में हल्का दर्द।
दवा और स्वाइन फ्लू के टेस्ट की जरूरत नहीं।
घर के बाहर नहीं निकलें और एहतियात के तौर पर डॉक्टर को दिखा सकते हैं।

दवा टेस्ट जरूरी, भर्ती भी हों

तेज बुखार, सांस में परेशानी, छाती में दर्द, ब्लड प्रेशर में उतार चढ़ाव, नाखून नीले, थूक में खून। इन लक्षणों के आने पर तुरंत टेस्ट कराएं। डॉक्टर की सलाह से तुरंत अस्पताल में भर्ती हों।

अलवर। राजीवगांधी अस्पताल में स्वाइन फ्लू आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रहे रोगी की रविवार रात को संदिग्ध अवस्था में मौत हो गई। डॉक्टर ने इसे स्वाइन फ्लू मानकर तो भर्ती किया और टेमीफ्लू भी दी गई, लेकिन सैंपल नहीं लेने के कारण उसकी जांच नहीं हो सकी है।

रविवार शाम को राजगढ़ निवासी दीनदयाल (25) पुत्र रामकिशोर सैनी को परिजन राजीव गांधी अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने उसे स्वाइन फ्लू का संदिग्ध रोगी मानकर वार्ड में भर्ती कर दिया। उसे टेमीफ्लू भी दी गई, लेकिन भर्ती होने के बावजूद रोगी का सैंपल नहीं लिया गया। रात को तबीयत बिगड़ने पर उसे जयपुर रैफर कर दिया गया, लेकिन जयपुर जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। परिजन स्वाइन फ्लू से ही मौत मान रहे हैं। स्वाइन फ्लू संदिग्ध का सैंपल नहीं लेने और परिजनों की ओर से पोस्टमार्टम नहीं कराने के कारण उसके रोगी की पुष्टि नहीं हो सकी है।

अबतक 19 पॉजीटिव केस, दो की मौत

जिले में स्वाइन फ्लू के अब तक 19 पॉजीटिव केस सामने चुके हैं। इनमें मुंडावर विधायक धर्मपाल चौधरी भी शामिल है। दो पॉजीटिव रोगियों की मौत हो चुकी है। जिला अस्पताल में भी स्वाइन फ्लू रोगियों की अलग से स्क्रीनिंग करने के आदेश है, लेकिन आउटडोर में रोजाना रहे करीब 900 रोगियों की संख्या के कारण यह व्यवस्था अब तक अस्पताल में शुरू नहीं हो पाई है।

बी-2 कैटेगरी में भी तेज बुखार, गले में तेज दर्द होता है। यह गर्भवती महिलाओं, लंग्स, हार्ट, कैंसर, लीवर, किडनी पेंशेंट के लिए है। इसमें मरीजों को दवा के साथ डॉक्टर की सलाह से विशेष सावधानी बरतनी की जरूरत है।

बी-1 मेंतेज बुखार, गले में तेज दर्द और खराश। इसमें टेमी फ्लू दवा ले सकते हैं।

मुश्किल से मिला स्वाइन फ्लू रोगी का पता

अलवर. राजीव गांधी अस्पताल में रजिस्ट्रेशन काउंटर पर लगी रोगियों की कतार।