पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • दादा पोते तक की शादी सम्मेलन में

दादा-पोते तक की शादी सम्मेलन में

6 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सुननेमें भले ही बड़ा अटपटा लगे लेकिन कई परिवारों में पिता- पुत्र शादी की सालगिरह एक ही दिन मनाई जाती हैं। इस आयोजन को लेकर परिवार की खुशी कई गुणा तक बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है, मनुमार्ग स्थित गुरुद्वारा में आयोजित होने वाले गुरुमुख सम्मेलन में उनका आनंद कारज (सामूहिक विवाह) हुआ। हर साल गुरुमुख सम्मेलन के आखिरी दिन 17 फरवरी को आनंद कारज होता है। इस बार 17 फरवरी को 42 वां आनंद कारज होगा। शेष|14पर













अबतक हुए 41 आनंद कारज के दौरान सैकड़ों जोड़े परिणय सूत्र में बंधे हैं। कई ऐसे परिवार हैं जिनकी दो पीढ़ियों की शादी आनंद कारज में हो चुकी है। इस प्रकार कई परिवारों में पिता- पुत्र की एक ही दिन 17 फरवरी को एक साथ शादी की सालगिरह मनाई जाती है।

इनका ऐसे हुआ आनंद कारज

मनुमार्ग स्थित गुरुद्वारा में 1973 में पहली बार आनंद कारज हुआ। इसमें फरीदाबाद के काशीराम गुलाटी, दिल्ली के रमेश बहल, गुडगांव के भगवानदास गुलाटी, नगीना बिजनौर के गुरबक्श परिणय सूत्र बंधन में बंधे। फरीदाबाद निवासी 65 वर्षीय काशीराम गुलाटी का कहना है कि सबसे पहले 1973 में मनुमार्ग स्थित गुरुद्वारा में आयोजित आनंद कारज में लेखड़ी निवासी हरभगवान देवी के साथ वे परिणय बंधन में बंधे। दादा हरभजन राम गुलाटी के समय से उनका परिवार गुरुमुख सम्मेलन से जुड़ा हुआ है। 1996 में काशीराम गुलाटी के बेटे अमित, 1997 में इनकी बेटी सीमा 2007 में बेटा पंकज का भी गुरुमुख सम्मेलन में आनंद कारज हुआ।

गुरु महाराज के बेटे का आनंद कारज

भाई जितेंद्र मदान कुक्कू के अनुसार रुड़की में आयोजित गुरुमुख सम्मेलन में गद्दीनशीन संतरेन डॉ. हरभजन शाह सिंघ महाराज के बेटे डॉ. यादवेंद्र शाह सिंघ का आनंद कारज हुआ।

सबसे अधिक 45 जोड़ों का हुआ आनंद कारज

जितेंद्र मदान कुक्कू के अनुसार पिछले 41 वर्षों में सबसे अधिक 45 जोड़ों का आनंद कारज 1990 दशक के दौरान और सबसे कम 1973 में चार जोड़ों का आनंद कारज हुआ।

अलवर. गुरुमुख सम्मेलन में आयोजित आनंदकारज। (फाइलफोटो)

बेटे-बेटियों का भी आनंद कारज

सन1979 में भाई जितेंद्र मदान का गुरुमुख सम्मेलन में आनंद कारज हुआ। इनके बेटे अशोक मदान का 2002 में दूसरे बेटे वरुण का 2007 में आनंद कारज हुआ। मदान का कहना है वे तीसरे बेटे विनोद का भी गुरुमुख सम्मेलन में आनंद कारज करेंगे। शेष|14पर











महेंद्रतनेजा ने बताया कि 1982 में गुरुमुख सम्मेलन में उनका आनंद कारज हुआ। इनके बेटे अभिषेक बेटी बिंदिया का 2005 में , बेटी शालू का 2006 में बेटे आशीष का 2011 में गुरुमुख सम्मेलन में आनंद कारज हुआ।

ऐसे हुई शुरुआत

आनंदकारज के दौरान अरदास कराने वाले भाई जितेंद्र मदान (कक्कु) भाई बसंत गांधी के अनुसार संतरेन रघबीर शाह सिंघ महाराज के मन में विचार आया कि शादी में गरीब पर अधिक भार नहीं पड़े, अनावश्यक खर्च नहीं हो, साथ गुरुसंगत को मिलाकर रखने के लिए आनंद कारज की शुरूआत की। गुरुमुख सम्मेलन में आने वाली संगत के बेटे बेटियों का आनंद कारज हुआ, जाे गुरु परिवार के नजदीक थे। आनंद कारज साधारण तरीके से होता है। गुरू महाराज की ओर से वर को पगड़ी और वधु को चुन्नी भेंट की जाती है। इसके बाद वे भी अन्य संगत की तरह लंगर में प्रसाद पाते हैं। गुरुमुख सम्मेलन में आनंद कारज करने वाले जोड़ाें में से महेंद्र तनेजा का कहना है कि गुरु (परमात्मा) के आशीर्वाद से जीवन में खुशहाली रहे, बिन बाधा के चलता है।