हेल्पर हटने के बाद देरी से बंट रही दवा
कई जिलों में हैं हेल्पर और ऑपरेटर
राज्यके जोधपुर सहित कई जिलों में कंप्यूटर ऑपरेटर और हेल्पर कार्यरत हैं। जोधपुर के अस्पताल में कंप्यूटर ऑपरेटर का कांट्रेक्ट 2015 तक किया हुआ है। वहीं हेल्पर भी काम कर रहे हैं।
पीएमओ को बताई समस्या
फार्मासिस्टने दवा वितरण केन्द्र में रही परेशानी को लेकर सोमवार को पीएमअो लिखित में शिकायत दर्ज कराई है। अस्पताल खुलने के दौरान रोगी दवा वितरण केन्द्रों पर पहुंच जाते हैं। इन दिनों आउटडोर में रोगियों की संख्या भी बढ़ी है, जिससे अस्पताल बंद होने के बाद तक केन्द्रों पर रोगियों की लाइन लगी रहती है। फार्मासिस्ट की दवा देने, रोगी को समझाने, दवा डिलेवरी की प्राप्ति, दवाओं को रैकों मे जमाने, स्टाॅक रजिस्टर में इन्द्राज करने और स्टाॅक अपडेट करने की जिम्मेदारी है।
^पूर्व में हेल्पर हटा दिए गए। इससे समस्या बढ़ी है। लेकिन अब निदेशालय को बजट के लिए लिखा जाएगा। बजट की स्वीकृति के बाद ही हेल्पर रखे जा सकते हैं। तत्काल हेल्पर की व्यवस्था संभव नहीं है। -डॉ.भगवान सहाय, पीएमओराजीव गांधी अस्पताल अलवर
भास्कर न्यूज|अलवर
अस्पतालोंके दवा वितरण केन्द्रों पर हेल्परों को हटाए जाने के बाद से ही निशुल्क दवा वितरण केंद्रों के हाल बिगड़ने लगे हैं। दवा वितरण से लेकर स्टॉक की गणना तक का सारा काम फार्मासिस्ट के जिम्मे आने से रोगियों को दवा बांटने में भी देरी हो रही है।
राजीव आंधी अस्पताल, जनाना अस्पताल एवं शिशु अस्पताल में नौ दवा वितरण केन्द्र हैं। उन पर 13 फार्मासिस्ट कार्यरत हैं। अस्पतालोें में केन्द्र शुरू होने के दौरान फार्मासिस्ट के अलावा कंप्यूटर ऑपरेटर और हेल्पर कार्यरत थे। लेकिन निदेशालय के आदेश पर कंप्यूटर ऑपरेटर हटा दिए और पूर्व पीएमओ के आदेश पर हेल्पर। इससे केन्द्रोें पर दवा वितरण की समस्या बढ़ गई। क्योंकि दवा वितरण के अलावा रैकों में जमाने, स्टॉक पूरा करने और इसकी इंट्री सहित सारे काम की जिम्मेदारी फार्मासिस्ट पर ही गई। एक साथ कई काम बढ़ने पर रोगी को काफी देर तक दवा के लिए इंतजार करना पड़ता है। क्योंकि सूचना सहायक मात्र रोगी पर्ची की ही कंप्यूटर में एंट्री करता है।
अलवर. राजीव गांधी अस्पताल के दवा वितरण केन्द्र पर लगी रोगियों की कतार।