- Hindi News
- नए एचआईवी संक्रमित रोगियों में 40 फीसदी की कमी आई
नए एचआईवी संक्रमित रोगियों में 40 फीसदी की कमी आई
27 दिन बाद जांच में पता चलेगा संक्रमित रोगी
प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. चौहान ने बताया कि अब सरकारी स्तर पर ऐसी जांच किट उपलब्ध हैं जिनसे एचआईवी एड्स के संक्रमित का 27 दिन में ही पता चल सकेगा। अब इन्हीं जांच किटों का ही उपयोग हो रहा है। रोगी का जल्दी पता चल सके, इसके लिए पीएचसी पर भी निशुल्क जांच की सुविधा उपलब्ध होगी। कई स्थानों पर पीएचसी पर जांच हो रही है।
गर्भवती टीबी रोगी की एचआईवी जांच जरूरी
राजस्थानएड्स कंट्रोल सोसायटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. एसएस चौहान ने कहा कि प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) के दौरान ही हर गर्भवती महिला की एचआईवी और एड्स की जांच जरूरी है। समय पर पता चलने पर संक्रमित संतान को जन्म से रोका जा सकता है। डाॅ . चौहान सोमवार को एचआईवी रोगियों को लेकर जिलेभर के काउंसलर की बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि टीबी रोगियों की भी जांच जरूरी है, क्योंकि टीबी रोगियों में भी इसके संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। सरकारी स्तर पर रोगियों को सोशल प्रोटेक्शन, पालनहार योजना, विधवा पेंशन, रोडवेज में सुविधा सहित कई योजनाओं से लाभान्वित कर संबल प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जहां एचआईवी की जांच की सुविधा है वहां किट की उपलब्धता सुनिश्चित करें। किट एमएनजेवाई से भी खरीद सकते हैं। इस मौके पर डीपीओ सुरेश शर्मा भी मौजूद थे।
अलवर. राजीव गांधी अस्पताल की सेंट्रल लैब का निरीक्षण करने के बाद डॉक्टर्स से चर्चा करते प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. एसएस चौहान।
भास्कर न्यूज|अलवर
राजस्थानमें नए एचआईवी संक्रमित रोगियों में चालीस फीसदी की कमी आई है। फिलहाल सामान्य लोगों में संक्रमण के फैलाव पर अंकुश पाने के लिए काम किया जा रहा है, जिससे नए रोगियों के बढ़ते ग्राफ को रोका जा सके। वहीं लोगों में एचआईवी एड्स के प्रति जागरूकता पर भी जोर दिया जा रहा है। यह जानकारी सोमवार को एचआईवी एड्स की मासिक समीक्षा बैठक में आए राजस्थान एड्स कंट्रोल सोसायटी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ. एसएस चौहान ने दी। उन्होंने बताया कि एचआईवी एड्स राष्ट्रीय स्तर पर 0.27 फीसदी लोगों में है, जबकि राज्य में 0.17 फीसदी ही है। जो राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले काफी कम है। लेकिन इसे जीरो लाने के उद्देश्य को लेकर कार्य किया जा रहा है। इसके लिए लोगों में जागरूकता बढ़ाने और एचआईवी एड्स रोगियों के प्रति समाज में भेदभाव