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दोस्ती या बेसहारा की मदद

7 वर्ष पहले
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अलवर. जयपुर रोड पर अकबरपुर से कुछ आगे गांव बलदेवपुरा गुर्जर में पिछले कुछ समय से बंदर के बच्चे और कुत्ते के व्यवहार को लेकर लोग आश्चर्यचकित हंै। कुछ लोग इसे दोस्ती बताते हंै तो कुछ इसे पशुओं में मदद करने की प्रवृत्ति बताते हंै। ग्रामीण बताते हंै कि कुछ समय पहले बंदर बंदरिया दोनों मर गए तो बच्चा अनाथ हो गया। उसके बाद से ही इस कुत्ते के साथ बंदर के बच्चे का इस तरह का व्यवहार चल रहा है, जैसे या तो इनकी दोस्ती गहरी हो गई है या फिर कुत्ता मदद के लिए उतर आया है। -फोटो देवेंद्र शर्मा