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पचास करोड़ खर्च हाेने के बाद भी एक साल में तीन बड़े प्रोजेक्ट बंद
बेकार पड़ा आडिटोरियम तरणताल
किस प्रोजेक्ट की क्या स्थिति
प्रदेशकी सरकार एक साल का जश्न मनाने की तैयारी कर रही है पर शहर में विकास के 3 बड़े प्रोजेक्ट्स पर 50 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद इसी एक साल के भीतर बंद कर दिए है। अब मिनी सचिवालय बनाने वाली कंपनी एसएएम इंडिया लि. ने यूआईटी को नोटिस देकर अपना बकाया मांगा है साथ ही कहा है कि काम बंद होने से इसकी लागत बढ़ रही है, पर यूआईटी इसमें कुछ भी करने को तैयार नहीं। न्यास के खाली खजाने से मिनी सचिवालय का काम अटका पड़ा है। दूसरी ओर, करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए ऑडिटोरियम एवं तरणताल का उपयोग नहीं हो रहा है।
शहर में जन सुविधाओं के विस्तार के नाम पर तीन बड़े प्रोजेक्ट शुरू किए गए थे। इनमें मिनी सचिवालय, इंदिरा गांधी स्टेडियम में तरणताल (स्विमिंग पूल) स्टेडियम के पास ऑडिटोरियम शामिल है। इनमें तरणताल एवं ऑडिटोरियम का काम लगभग पूरा हो चुका है। मिनी सचिवालय का काम बंद पड़ा है।
शहर में एक ही स्थान पर विभिन्न सरकारी कार्यालयों को स्थापित करने के लिए मिनी सचिवालय का निर्माण शुरू किया गया था। इसका मकसद शहर में यातायात के भार को कम करना भी है। यह प्रोजेक्ट 140 करोड़ रुपए का है। जून 2013 में शुरू हुआ यह काम दो साल में पूरा होना है, लेकिन पिछले नौ महीने से मिनी सचिवालय का काम बंद पड़ा है। यूआईटी से निर्माण राशि नहीं मिलने के कारण काम रुका पड़ा है। ठेका कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि काम बंद होने से उनके करीब श्रमिक बिना काम के बैठे हैं। शर्तों के मुताबिक ठेके में पूर्व में निर्धारित निर्माण लागत से अधिक का खर्च कंपनी का होगा। कंपनी का करीब 40 करोड़ रुपए खर्च हो चुका है जबकि यूआईटी की ओर से कंपनी को 17 करोड़ रुपए का ही भुगतान किया गया है।
यूआईटी का खजाना खाली
^यूआईटीका खजाना खाली है। इसलिए हम मिनी सचिवालय निर्माण से जुड़ी कंपनी को राशि नहीं दे पा रहे हैं। इस मामले में राज्य सरकार को पत्र लिखा गया है। निर्माण ठेके से जुड़ी कंपनी ने आवास विकास लि. को कानूनी नोटिस भेजा है। हमने निर्माण के लिए आवास विकास संस्थान को एजेंसी के रूप में काम सौंपा था। संस्थान ने यूआईटी को भी ठेकेदार का कानूनी पत्र भेजा है। ऑडिटोरियम के लिए इस महीने बुकिंग आई है। तरणताल के बारे में अभी विचार चल रहा है। -महेंद्रलोढ़ा, सचिव,यूआईटी, अलवर।
^मार्च20