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अब इथरीन गैस से पकेंगे पौष्टिक फल

6 वर्ष पहले
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राइपनिंग चैंबर बनाने वाले किसान को उद्यान विभाग की ओर से कुल लागत पर 35 फीसदी सब्सिडी मिलेगी। इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए बैंक लोन देगी। इसमें किसान सब्सिडी पर 300 मैट्रिक टन के चैंबर का निर्माण कर सकते हैं। सब्सिडी की राशि तीन साल बाद ही मिलेगी, लेकिन यह राशि बैंक में जमा कर दी जाएगी। बैंक में जो राशि सब्सिडी के रूप में जमा होगी, उतनी लोन की राशि किसान के लिए ब्याज मुक्त रहेगी। तीन साल तक चैंबर के सफल संचालन पर उद्यान विभाग की हरी झंडी के बाद सब्सिडी राशि उसकी लोन राशि में जमा हो जाएगी।

जिलेका पहला राइपनिंग चैंबर होगा

^जिलेमें पहला बनाना राइपनिंग चैंबर का निर्माण कराया जा रहा है। नारायणपुर में निर्मित चैंबर में 65 मैट्रिक टन केला, आम पपीता पकाने की क्षमता है। इसकी 81 लाख की लागत पर उद्यान विभाग की ओर से 35 फीसदी सब्सिडी यानी करीब 22.75 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। इससे कार्बाइड के पके फलों से मुक्ति मिल सकती है। -हितेन्द्रगेरा, सहायक निदेशक उद्यान विभाग अलवर

भास्कर संवाददाता | अलवर

जिलेके लोगों को अब स्वास्थ्य के लिए खतरनाक कैल्शियम कार्बाइड से पके फलों से शीघ्र ही मुक्ति मिल सकती है। नारायणपुर में 81 लाख रुपए की लागत से केला, पपीता एवं आम पकाने के राइपनिंग चैंबर का निर्माण किया जा रहा है। यहां 13-13 मैट्रिक टन क्षमता के पांच चैंबरों का निर्माण किया जा रहा है। चैंबर निर्माण के बाद फलों को कंप्यूटराइज्ड सिस्टम के साथ इथरीन गैस से पकाया जाएगा। राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत इस प्रोजेक्ट पर उद्यान विभाग की आेर से 35 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। इस प्रोजेक्ट के मार्च अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। जिले के पहले राइपनिंग चैंबर से जिले के बड़े व्यापारियों को फल पकाने में मदद मिलेगी।

हालांकि इस चैंबर में फलों को पकाने में चार से पांच दिन का समय लगेगा, लेकिन फल भरपूर पोषक तत्वों के साथ सेहत के लिए लाभकारी होंगे। वहीं कैल्शियम कार्बाइड से खराब होने वाली फलों की छीजत भी बच सकेगी। शेषपेज |16

नारायणपुर बाईपास पर निर्माणाधीन चैंबर।