जून तक दालों के भाव नहीं बढ़ने की उम्मीद, उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
प्रदेशमें इस बार दलहन उत्पादन का रकबा बढ़ा है। यह केंद्र और राज्य के सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल रहा है। खरीफ की फसल में 2015 के दौरान 28 लाख 30 हजार 765 हैक्टेयर में दलहन की बुवाई हुई। यह 2014-15 (20.29 लाख हैक्टेयर) और 2013-14 (22.21 लाख हैक्टेयर) से काफी अधिक है। बुवाई का क्षेत्र बढ़ने के साथ ही उत्पादन भी बढ़ा। 2015 में दलहन का उत्पादन 10 लाख 4 हजार 974 मै. टन का उत्पादन हुआ, जो कि 2014-15 के 9.63 लाख मै.टन और 2013-14 के 7.73 लाख मै. टन से कहीं ज्यादा अधिक है। रबी का रकबा 11 लाख 91 हजार 899 हैक्टेयर का रहा है। यह पिछले साल से तो कम है, लेकिन संभावित उत्पादन पिछले साल से अधिक बताया जा रहा है। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता का कहना है कि दालों में भावों में बढ़ोतरी के पीछे मल्टी नेशनल कंपनियों का हाथ है। आयात करने के बाद भी ये कंपनियां बंदरगाह पर स्टॉक कर रख लेती है और भाव बढ़ने पर माल जारी कर करती है। सरकार कुछ नहीं कर पाती। छोटा व्यापारी हजार-पांच सौ बोरी रख ले कार्रवाई हो जाती है। सरकार को चाहिए कि राज्य में अच्छे उत्पादन के मद्देनजर स्टॉक करके रख लें और सीमा में छूट दें। साथ ही आयात को बढ़ावा दें तो उपभोक्ता को राहत मिल सकती है। उन्होंने वायदा कारोबार पर भी अंकुश पर भी जोर दिया।