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मंगलयान अभियान में वागड़ के वैज्ञानिक का भी योगदान

7 वर्ष पहले
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कमसमय और कम लागत में तैयार किए गए मंगलयान के सफल अभियान से जुड़े वागड़ के मूल निवासी और इसरो अहमदाबाद में वैज्ञानिक के रूप में कार्य कर चुके डॉ. राजमल जैन का भी अहम योगदान रहा।

उन्होंने भास्कर से विशेष बातचीत के दौरान बताया कि विश्व में भारतीय वैज्ञानिकों की यह पहली उपलब्धि है, जो कम समय और कम लागत में पूरी की गई। देश के वैज्ञानिक किसी से कम नहीं हैं, इस बात को मंगलयान अभियान की सफलता ने साबित कर दिया है। इसका असर आने वाले वर्षों में अन्य महत्वपूर्ण अभियानों पर भी पड़ेगा। अपनी बांसवाड़ा यात्रा के दौरान पिछले कुछ वर्षों के दौरान सूर्य के संबंध में किए गए वर्षों के अध्ययन और मंगल पर यान भेजे जाने की जानकारी देने वाले डॉ. राजमल जैन मूलत: सागवाड़ा के हैं, जिन्होंने अपने श्रम से इसरो में अपना मुकाम बनाया। नासा स्पेस सेंटर अमेरिका के सलाहकार के रूप में कार्यरत रहे डॉ. जैन ने जहां सूर्य पर निरंतर होने वाले विस्फोटों का धरती पर पड़ने वाले प्रभावों पर काफी काम किया है। मंगलयान की योजना बनने के समय उनके द्वारा वातावरण अध्ययन और मिथेन आदि गैसों का पता लगाने तैयार किए गए सेंसर के संबंध में कार्ययोजना पर काफी मंथन हुआ था। उनके मित्र वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानचंद जैन के बनाए उपकरणों को मंगलयान में उपयोग में लेने की योजना बनी थी।

डॉ. जैन ने बताया कि वर्ष 2017 में भी मंगल और अन्य ग्रहों पर भेजे जाने वाले यान में उनके और उनके साथी वैज्ञानिकों द्वारा इसरो अहमदाबाद में कई वर्षों के अनुसंधान के बाद तैयार किए गए उपकरणों का उपयोग स्पेस क्राफ्ट में किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि डॉ. जैन का ससुराल शहर के गणपति चौक में है और वे माही बेक वाटर क्षेत्र में स्पेस और प्लेनेट स्टडी के लिए विशेष दूरबीन लगाकर अध्ययन केंद्र स्थापित करना चाहते हैं।

डेगली माता चौक पर तरुण क्रांति मंच की ओर से आतिशबाजी की गई।