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सरकार चाहती है निजी अस्पताल से भी अच्छी सफाई, यहां कचरा डालने डस्टबिन भी नहीं

7 वर्ष पहले
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(एक वार्ड में मैली चद्दर को देखने के बाद रिपोर्ट बनाते डॉ. बैरवा।)
बांसवाड़ा। जिले के सबसे बड़े सरकारी महात्मा गांधी अस्पताल में शुक्रवार को एक भी कमरा, बरामदा-केबिन ऐसा नहीं था, जहां पर सफाई की पूरी व्यवस्था हो। अस्पताल का निरीक्षण करने आए चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक को एक भी कमरे में कचरे की बाल्टी तक नहीं मिली। संयुक्त निदेशक डॉ. आरएन बैरवा और उनकी टीम को दौरे में एक भी व्यवस्था ऐसी नहीं थी, जिससे वे संतुष्ट दिखाई दिए हों। सुबह 9 बजे शुरू हुआ निरीक्षण शाम को 6 बजे तक चला। बैरवा, बायाे इंजीनियर प्रतीक पालीवाल, ओए बीडी पारीख टीम में शामिल रहे।
इस दौरान डॉ. एनएल चरपोटा, हैल्थ मैनेजर हेमलता जैन, नर्सिंग अधीक्षक अरविंद चौबीसा, भरत और कुछ कार्मिक साथ थे। बैरवा जब ट्रोमा सेंटर में पहुंचे, यहां का हाल देखकर तो उनका माथा ठनका। यहां डॉक्टरों की ड्यूटी का बोर्ड एक दिन पहले का लगा हुआ था। जगह-जगह निशान बने हुए थे। यहां पर एक भी कोना ऐसा नहीं था, जहां पर सफाई हो।
वे बोले- सरकार चाहती है कि सरकारी अस्पताल निजी अस्पताल से अच्छे हो आैर यहां तो हालात ही अलग हैं। अधिकारियों से पूछा- यह बताओ ट्रोमा वार्ड को चमकाओगे कैसे। मुझे ताे यह चमकता हुआ चाहिए। ट्रोमा सेंटर और मुख्य दरवाजे के बीच में तीन कमरे ऐसे थे, जिनमें स्टोर बनाया हुआ था। इस पर उन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, इन कमरों को स्टोर की बजाय दूसरे काम में उपयोग किया जाना चाहिए। बड़े कमरों में स्टोर वह भी मौके के, ऐसा नहीं होना चाहिए। यही नहीं, जब ऑर्थोपेडिक डॉक्टर के रूम में गए तो यहां पर भी आधे कमरे को स्टोर बनाया हुआ था। इस पर भी नाराजगी जाहिर की।

- शुक्रवार को सभी डॉक्टर समय पर अस्पताल गए और इलाज शुरू कर दिया।
- एड्स सोसायटी के रूम में महिला काउंसलर नहीं मिली। डायरी में नोट किया।
- अस्पताल में 30 साल पहले भी दो ऑपरेशन थियेटर थे, आज भी दो हैं। पूछा-कब व्यवस्थाएं बदलेंगी। प्रस्ताव भेजने को कहा।
- डेंटल सेक्शन में डॉ. मीणा से खूब सवाल किए। कुछ मशीनों में सिस्टम काम ही नहीं कर रहे हैं। इंजीनियर बुलाने को कहा। एक्स-रे मशीन खराब होती रहती है।

प्रस्ताव बनाकर भेजने के निर्देश : अस्पताल की व्यवस्थाओं के लिए पीडब्ल्यूडी के चिकित्सा खंड के एईएन मुकेश वाडेल को बताया गया। अस्पताल में मरम्मत कराने के लिए खर्च की राशि का प्रस्ताव बनाने के लिए कहा। वाडेल ने कहा कि अभी रंग रोगन कराया है। बैरवा ने कहा-मुझे आज ही पूरा प्रस्ताव बनाकर दो।

व्यवस्थाएं करों, बहाने मत बनाओ : अस्पताल में बने शौचालयों में बैरवा काे बाल्टी, मग और साबुन नहीं मिला। तुरंत अधिकारियों ने कहा कि गायब हो जाते हैं। बैरवा ने कहा क्या यहां कोई रहता नहीं है। जब बेड की चादर छह माह में खत्म हो जाती है तो बाल्टी-मग भी बार-बार रखे जा सकते हैं। कोई कितने बाल्टी मग गायब करेगा। मुझे ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है, बांसवाड़ा 26 साल रहा हूं। आप केवल व्यवस्थाएं करो, बहाने मत बनाओ।

वार्ड में भी गंदगी, फौरी तौर पर होती है सफाई : सभी वार्ड में भी गंदगी थी, फर्श पर फौरी तौर पर ही कचरा साफ किया जाता है। इस पर मशीन से कचरा साफ करने के आदेश दिए गए। सभी कमरों में कचरे की बाल्टी रखने के आदेश हैं। सभी कमरों में किस बाल्टी में किस प्रकार का कचरा डालना है,लिखा जाएगा। नर्सिंग स्टूडेंट को पता ही नहीं होता है कि किस बाल्टी में कचरा डालना है। कई छात्राओं से पूछा तो वह कोई जवाब नहीं दे सकीं।

पानी निकालने की सुविधा क्याें नहीं : बैरवा ऑटो क्लेब रूम पर ताला देखकर रुक गए। अधिकारियों को कहा-इसे खुलवाओ, अधिकारियों ने कहा-सबकुछ सही है। फिर कहा, खुलवाओ। मैं यहां पर दो दिन रहूंगा, एक-एक कमरे को देखूंगा। रूम को खुलवाया तो कपड़ों में कीटाणु मारने की मशीन लगी हुईं थीं। एक मशीन से पानी टपक रहा था। पूछा, ऐसा कैसे हो सकता है। पता चला कमरे से पानी निकासी का कोई साधन नहीं है। ऐसे में एईएन मुकेश वाडेल को बुलवाया। यहां पर कुल तीन मशीन चालू और तीन खराब हालत में मिलीं। छोटी मशीनों को सही कराकर वार्ड में शिफ्ट करने के आदेश भी दिए। इंजीनियर पालीवाल से भी मशीनें चैक कराईं।

मैली चद्दर देख बनाई रिपोर्ट
महात्मा गांधी अस्पताल के निरीक्षण में मिली कई अव्यवस्थाएं
चिकित्सा विभाग के संयुक्त निदेशक की टीम बांसवाड़ा पहुंची, पूरे दिन अस्पताल में की जांच ।