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कुशलबाग मैदान से स्वच्छ और स्वस्थ बांसवाड़ा अभियान का आगाज
कुशलबागमैदान में शुक्रवार को प्रख्यात कथा मर्मज्ञ गिरि बापू के सानिध्य में स्वच्छ, स्वस्थ और सभ्य बांसवाड़ा शहर अभियान के तहत संकल्प पत्र का विमोचन किया गया। गिरि बापू ने नागरिकों के साथ ही शिवकथा में आए ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालुओं का भी आह्वान किया कि वे अपने गांव-कस्बे और नगर को स्वच्छ और सुंदर रखने में सहयोग करें।
बापू ने सभी से बांसवाड़ा को स्वच्छ और सुंदर बनाने की जिम्मेदारी का निर्वहन करने को कहा। नगर परिषद यह संकल्प पत्र आने वाले दिनों में प्रत्येक वार्ड के नागरिकों तक पहुंचाएगी और उनसे संकल्प लेकर अपने वार्ड में सफाई अभियान में सहयोग का आह्वान करेगी। इस कार्यक्रम में विधायक धनसिंह रावत, नगर परिषद सभापति मंजुबाला पुरोहित, उपसभापति महावीर बोहरा, भाजपा जिलाध्यक्ष एडवोकेट मनोहर पटेल, पार्षद लाभचंद पटेल, विमल भट्ट, सुधा मौर्या, नीलेश्वरी, भुवनेश्वरी मालोत, राजेश्वर चौहान की मौजूदगी में आमजन को इस स्वच्छता अभियान से जोड़ने का शुभारंभ किया गया।
येभी रहे मौजूद : कार्यक्रममें श्री त्रिवेदी मेवाड़ा ब्राह्मण समाज तथा शिवकथा आयोजन समिति के अध्यक्ष निमेष मेहता, कार्यकारी अध्यक्ष शांतिलाल चौबीसा, संयोजक टीआर जोशी, कथा सूत्रधार भूपेंद्र पंड्या, वरिष्ठ उपाध्यक्ष बालूभाई त्रिवेदी, उपाध्यक्ष एडवोकेट लक्ष्मीकांत त्रिवेदी, कोषाध्यक्ष मुकेश ठाकुर, सलाहकार महेश पंचाल, संगठन मंत्री शांतिलाल भावसार के साथ ही कथा आयोजन के मुख्य यजमान नारायणलाल त्रिवेदी भी मौजूद थे।
ईर्ष्यामनुष्य की शत्रु : बापू
श्रीत्रिवेदी ब्राह्मण समाज और शिवकथा आयोजन समिति के सानिध्य में 4 दिसंबर से कुशलबाग मैदान में चल रही शिवकथा का समापन शुक्रवार को हुआ। कथा के अंतिम दिन गिरि बापू ने कहा कि मानव की सबसे बड़ी शत्रु ईर्ष्या है। ईर्ष्या का सबसे बड़ा नुकसान स्वयं ईर्ष्या करने वाला ही उठाता है। आज समाज में दूसरों की उन्नति और समृद्धि से जलन की प्रवृत्ति बढ़ रही है। किसी अन्य की उन्नति के प्रति द्वेष का भाव मनुष्य और देवत्व के स्थान पर आसुरीवृत्ति का परिचायक है। उन्होंने कहा कि जीवन में वही व्यक्ति प्रगति कर सकता है जो ईर्ष्या भाव से मुक्त है। बापू ने सम्मान और प्रशस्ति के पीछे के सच को उदघाटित करते हुए कहा कि विवेकशील तथा समझदार व्यक्ति को सदैव प्रशस्ति से बचना चाहिए। सम्मान हमें वास्तविकता से अलग कर देता ह