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एटीएम में नकदी की हेराफेरी करने वाले शातिर, जुर्म कबूलनेे के बाद से बरामदगी में पुलिस को उलझा रहे

5 वर्ष पहले
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लाखोंकी हेराफेरी के मामले में रिमांड पर चल रहे एटीएम में नकदी डालने वाली कंपनी सीएमएस के कर्मचारियों से बरामदगी पुलिस के लिए चुनौती बन गई है।

शहर कोतवाली में पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी अपना जुर्म कबूल चुके हैं, लेकिन इतने शातिर हैं कि पुलिस को ही गुमराह करते रहे कि नकदी कहां ठिकाने लगाई और उसकी बरामदगी कैसे होगी। बैंकिंग में तकनीक के बूते पर गबन का यह केस पुलिस से भी आसानी से नहीं सुलझ पा रहा है।

हालांकि सूत्र बताते हैं कि कुछ रिकवरी हुई है, लेकिन पुलिस वह बताने लायक नहीं समझ रही। नोटबंदी के चलते बड़ी रकम इधर-उधर करने के बाद अब आरोपी किसे कितने दिए और बाकी का क्या किया कुछ बता नहीं रहे। दूसरी ओर, सीआई मनीष चारण ने बताया कि अब तक कोई बरामदगी नहीं हुई है।

आरोपियों से लगातार पूछताछ कर रहे हैं, दूसरी ओर, अनुसंधान अधिकारी मनोहरसिंह ने बताया कि आरोपी बाहुबली कॉलोनी निवासी अंतिश पंडवाल और अजमेर निवासी हरीश महावर 31 लाख रुपए आपस में बांटना स्वीकार कर चुके हैं, लेकिन दोनों के बयानों की पुलिस पुष्टि कर रहे हैं, लेकिन वे लगातार गुमराह कर रहे हैं।

गौरतलब है कि सीएमएस के कर्मचारियों ने नोटबंदी के बाद एटीएम की करीब 1 करोड़ 02 लाख 89 हजार 200 रुपए की गड़बड़ी की। इसमें दबाव पर 63 लाख के पुराने नोट बैंक ऑफ बड़ौदा में जमा करवाए, लेकिन छह मशीनों के 39 लाख रुपए हड़प कर गए। इसे लेकर भास्कर ने लगातार खबरें प्रकाशित की। उसके बाद केस दर्ज हुआ।

20 दिसंबर को प्रकाशित

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