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एक ही तेज बारिश में टपकने लगा 12 करोड़ में बना एमसीएच अस्पताल

4 वर्ष पहले
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शहरके राजकीय एमजी अस्पताल परिसर में 12 करोड़ की लागत से बने नया मातृ और शिशु अस्पताल (एमसीएच) भवन एक बारिश भी झेल नहीं पाया। 3 दिन पहले हुई इस सीजन की पहली तेज बारिश के बाद अस्पताल की छतों में सीलन गई है। लेबर रूम में तो पानी टपकने से कर्मचारी और प्रसूताओं को भी परेशान होना पड़ रहा है।

जगह-जगह पानी की सीलन और छत रीतने से इस एसी भवन में शाॅर्ट सर्किट और पीओपी गिरने का खतरा बढ़ गया है। यह स्थिति तब है, जब 4 मंजिला इस अस्पताल का 4 मई को ही मुख्यमंत्री ने उदघाटन किया है। ऐसे में वार्डों में पानी की सीलन भवन के निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।

अस्पताल की तीसरी मंजिल पर गायनिक ऑपरेशन थियेटर के नजदीक 10 बेड वाले ऑपरेटिव वार्ड में सीलन से छत और दीवार पर काईं जम चुकी है। निचले तल पर बने लेबर रूम में तो बारिश शुरू होने के थोड़ी ही देर में पानी टपकने लगता है। पानी की बूंदें एसी और सिलिंग में से होकर गिरती है। नए आईसीयू वार्ड में कुछ दिन पहले ही शाॅर्ट सर्किट हुआ था। इसके अलावा एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक जाने के लिए बनाए रास्ते में भी कई जगह खिड़कियों के ठीक ऊपर सीलन दिखती है। वार्ड में पीने के पानी की समस्या अलग है। इसका अस्पताल प्रशाासन आज तक समाधान नहीं निकाल पाया है।

एमजी अस्पताल परिसर में नया बनाया गया एमसीएच भवन, जो पहली बारिश में ही टपकने लगा।

सरकार ने नया अस्पताल तो बना दिया, लेकिन स्थानीय अस्पताल प्रशासन की बदइंतजामियों के चलते गर्भवती और उनके परिजनों को परेशान होना पड़ रहा है। इसके प्रवेश द्वार को बंद कर रखा है। गर्भवती और बच्चों को पुराने भवन से प्रवेश दिया जा रहा है। पुराने भवन से नए भवन में जाने के लिए 3 हॉल और एक रैंप पर चलना पड़ता है। जिससे कई बार आपात स्थिति में आने वाली गर्भवतियों को इतना चलने में परेशानी होती है। इसके अलावा ऐसी महिलाओं को अस्पताल के भीतर तक ले जाने के लिए कोई स्ट्रेचर तक की सुविधा नहीं दी जा रही है।

^लेबर रूम में एयर कुलिंग के किसी पाइप में पानी लीकेज था, जिसे ठीक करवा दिया गया है। तीसरी मंजिल पर अगर पानी के सीलन की कोई शिकायत है तो कल ही दिखवा लूंगा। भवन की 3 साल की देखरेख की जिम्मेदारी भी हमारी है। कोई शिकायत हाेगी तो तुरंत ठीक करवाएंगे। इतने बड़े अस्पताल में छोटी-मोटी समस्या तो आती रहती है, जिसे तुरंत सही भी कर रहे हैं। जहां कहीं सीलन की परेशानी आएगी, ठीक करवा दी जाएगी। -एपीमाथुर, एईएन, एनआरएचएम

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