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प्रधानाचार्य पदोन्नति काउंसलिंग पर सुप्रीम कोर्ट का स्टे

4 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा. शिक्षानिदेशालय बीकानेर में हो रही प्रधानाचार्य पदोन्नति काउंसलिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे लगा दिया है। शिक्षा अधिकारी संघ रेसला और रेसा की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार और दोनों संगठन की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और नियमावली के बाद यह निर्णय सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट में रेसला की तरफ से मुकुल रोहतगी और रेसा की ओर से कपिल सिब्बल ने केस की पैरवी की। इससे पूर्व 10 जुलाई को हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली डबल बैंच ने प्रधानाचार्य पदोन्नति को सही ठहराते हुए रेसा के पक्ष में फैसला दिया। रेसला ने हाईकोर्ट के फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहली सुनवाई में ही खारिज कर दिया है। दरअसल माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 20 अप्रैल 2017 को 2800 प्रधानाचार्यों की डीपीसी की गई थी। जिसमे 1728 प्रधानाध्यापकों और 1122 व्याख्याताओं को पदोन्नत किया गया था। इसके विरोध में रेसला ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, लेकिन हाईकोर्ट की सिंगल बेंच और उसके बाद डबल बैंच ने डीपीसी को सही बताया गया। राजस्थान में लगभग 10 हजार उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं जिनमें प्रधानाध्यापक और व्याख्याताओं का 33% और 67% कैडर तय किया गया है। प्रधानाध्यापक कोटे के अधिक पद रिक्त होने से अधिक प्रधानाध्यापकों को डीपीसी से प्रधानाचार्य बनाया गया है। रेसला ने इसका विरोध किया था। रेसा के जिलामंत्री किशनसिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर संगठन में हर्ष है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष रामलाल खराड़ी, शीतल पंड्या, दुर्गा शर्मा आदि मौजूद थे।

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