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आपके क्षेत्र को ही नहीं हमारे इलाके को भी चाहिए यूरिया
सबकुछठीक रहा तो यूरिया की किल्लत दो दिन में खत्म हो सकती है। रविवार की रात में चित्तौडगढ़ या रतलाम में बांसवाड़ा में यूरिया उपलब्ध कराने के लिए रैक लगेगी। जिले में यूरिया की किल्लत अब प्रदेशभर में गूंजने लगी है। इसके लिए प्रभारी मंत्री ने कृषि मंत्री ने बात की है। साथ ही स्थानीय कृषि अधिकारियों को आदेश दिया है कि हर दिन की मॉनीटरिंग कर उनको इसकी रिपोर्ट दी जाए। इससे वह जरूरत होने पर अन्य अधिकारियों से भी बातचीत कर सकें।
प्रभारी मंत्री जीतमल खांट ने कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी से वार्ता की है। प्रभारी मंत्री ने बताया कि कृषि मंत्री को कहा गया है कि यूरिया खाद आपके क्षेत्र को ही नहीं, हमारे क्षेत्र को भी चाहिए। आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिले के किसानों के बाद बहुत बड़ा बाजार भी नहीं है। इस कारण यहां पर लैम्पस में यूरिया आने पर ही किसानों को राहत मिल सकती है। इस कारण हमारे क्षेत्र को प्राथमिकता के साथ यूरिया उपलब्ध कराएं। कृषि मंत्री की ओर से जबाव दिया गया है कि रविवार की रात में चित्तौडगढ़ या रतलाम में बांसवाड़ा के लिए यूरिया की रैक लगवाई जाएगी। मंगलवार को बांसवाड़ा में खाद मिलना शुरू हो जाएगा। इस मामले में दो दिन पहले ही प्रभारी मंत्री के दखल के बाद आठ करोड़ रुपए का ऋण लैंप्स के लिए स्वीकृत किया गया है।
आज होगी स्थिति साफ
इससंबंध में कृषि विस्तार उप निदेशक भूरालाल पाटीदार ने बताया कि रविवार को यूरिया की क्या स्थिति रही, इसके बारे में सोमवार को ही पता चल पाएगा। हमारी ओर से यूरिया के लिए सभी प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। कलेक्टर स्वयं अधिकारियों से वार्ता कर रहे हैं।
जिले में करीब 40 हजार मैट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है। किसानों को राहत उस यूरिया से ही मिलती है तो लैंप्स पर पहुंचता है। निजी दुकानों पर तो ऊंचे दामों पर यह यूरिया मिलता है। किसान गेहूं की बुवाई के समय ही यूरिया पूरे सीजन कर खरीद लेता है। इससे किसान को बार बार यूरिया नहीं खरीदना पड़ता है। अभी तक यदि मान भी लिया जाए कि 15 हजार टन यूरिया गया तो भी 25 हजार एमटी यूरिया की जरूरत है ही।
25 हजार टन की अभी भी जरूरत