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स्थाई नौकरी देने का मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा बांसवाड़ा में 24 यशोदाएं कार्यरत

7 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा| वर्तमानमें सरकारी अस्पताल में जिस भी बच्चे ने आंखें खोली तो जो पहली मां दिखाई देती है, वह है यशोदा मां। दूसरे बच्चों का लालन पालन तरीके से करने वाली मां, अपने बच्चों के लिए दर दर की ठोकरें खां रही हैं। मामला इनकी नौकरी से जुड़ा हुआ है। करीब बीते पांच वर्ष से प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में यशोदाएं सेवाएं दे रहीं हैं। प्रदेशभर में करीब 600 यशोदाएं सेवाएं दे रहीं हैं। इनको माह में की गई ड्यूटी के आधार पर मानदेय दिया जाता है। अभी तक इनका मानदेय आदि का भुगतान एनआरएचएम के तहत किया जा रहा है। अब प्रदेशभर की यशोदाओं ने नौकरी की मांग की है। इसके लिए हाल में प्रदेशभर से कई यशोदाएं मुख्यमंत्री से मिली आैर स्थाई करने की मांग की है। साथ ही अपने अपने जिलों में विधायकों को भी ज्ञापन आदि दिया गया है। बांसवाड़ा में भी 24 महिलाएं यशोदा के रूप में काम कर रही हैं। बांसवाड़ा एमजी एच में रश्मि शबनम, सुधा नागदा, मेहमूदा, जशोदा डामोर, अनीता यादव, विजयम्मा, कांता यादव,चंदा वडेरा, नीलम वैष्णव, रफिउन्निसा, इंदूबाला, कविता डिंडोर, ममता शर्मा, अन्तिमा, गीता डामोर, प्रेमलता चौबीसा, मंजू नागर, सीमा संजय, नफीसा, कांता कटारा, जयश्री आचार्य, हेमा झाला और निर्मला शामिल हैं।