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आइए, मिलजुल कर शहर को बनाएं स्वच्छ

6 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा। शहर में रोजाना करीब 25 से 30 टन कचरा होता है। किसी भी छोटे शहर के लिए यह बड़ा आंकड़ा है। शहर भर में रोजाना साफ-सफाई का काम होता है। इसके लिए नगर परिषद भारी-भरकम रुपए भी खर्च करती है। फिर भी कचरा है कि खत्म होने का नाम ही नहीं लेता।
गली-मोहल्लों से लेकर सड़कों पर कचरा फैला नजर आता है, नालियां गंदगी और कचरे से भरी दिखती हैं। संगठित और असंगठित दोनों ही क्षेत्रों में यह बड़ी समस्या बना हुआ है।

समस्या जरूर बड़ी और विकराल है, लेकिन हमारे छोटे-छोटे प्रयासों से इसे आसानी से हल किया जा सकता है। समाधान है- घर-घर से कचरा उठाना। नगर परिषद ने दो महीने पहले कई कचरा-पात्र मंगवाए हैं। इन्हें शहर के 45 वार्डों में इसे रखा जा सकता है, लेकिन नगर परिषद प्रशासन अब तक इनके बारे में निर्णय ही नहीं कर पाया।
अब बारी हमारी है। यदि हम अपने-अपने घरों से तय समय पर कचरा एकत्रित कर लें, पड़ोस के खाली प्लॉट, सड़क या नाली में डालें तो कुछ ही दिनों में ही शहर की तस्वीर बदल जाएगी।

इन दिनों शहर में जहां देखो वहां पर खुले में कचरा फेंकने के हालात बने हुए हैं। वहीं कहीं-कहीं खुले में डाला गया कचरा शाम तक नहीं उठ पाने से क्षेत्रवासी परेशान होते रहते हैं। इन हालात में आबादी के हिसाब से छोटे-बड़े कचरा-पात्र रखवाकर काफी हद तक सुधार लाया जा सकता है। जिससे लोग भी प्रेरित होंगे और खुले में नहीं डालकर कचरा-पात्र में ही डाल सकें।
ऐसे स्थानों को चिह्नित कर समय पर कचरा उठवा कर उसे ठीक से साफ सुथरा रखवाने में क्षेत्रवासी पहल कर सकते हैं। इन स्थान पर सफाई के दौरान फिनाइल आदि दुर्गंधनाशक पदार्थों का उपयोग करने से ही हालात में बदलाव आएगा और शहर साफ-सुथरा बन पाएगा।

व्यापारी मदद को तैयार

बांसवाड़ा चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष आदेश्वर जैन का मानना है कि अब समय गया है कि शहर और शहरवासियों को संक्रमण से बचाने के लिए सफाई का प्रमुख प्राथमिकता दी जाए। इसमें वे सहयोग को तैयार हैं।
सेंट्रल इंडस्ट्रीज सिक्योरिटी फोर्स के अहमदाबाद में डिप्टी कंमांडेंट मधुकर पंड्या का कहना है कि जीवन में अनुशासन की तरह शहर की नियमित साफ सफाई का खासा महत्व है, जिस पर सभी को मिलजुल काम करना चाहिए और इसके लिए सभी पक्षों का सहयोगात्मक रवैया आवश्यक है।

कानूनी पक्ष

निकाय के कानूनी जानकार एडवोकेट अख्तर खान अकेला से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि नगर पालिका अधिनियम के तहत गंदगी फैलाने पर 50 से 500 रुपए तक का जुर्माना और तीन माह की जेल का प्रावधान है। वहीं भारतीय दंड संहिता की धारा 269 में 500 रुपए जुर्माना और 6 माह के कारावास की सजा का प्रावधान है।
पहले नगर परिषद चुनाव की आचार संहिता आड़े आई तो बोर्ड बनने के बाद अब तक मीटिंग नहीं होना इसके पीछे कारण रहा। अब शहरवासी ठान लें तो इनका उपयोग भी हो सकता है और गली मोहल्लों में सफाई भी रह सकती है।