बांसवाड़ा। 77थाउजेंड मिलीयन क्यूबिक क्षमता वाले माही बजाज सागर बांध के बेकवाटर में लाखों बीज डाले गए हैं, जिससे मछलियों की तादाद बढ़ाई जाएगी। मछलियों को पालने के लिए 54 पिंजरे लगा दिए गए हैं।
मत्स्य पालन विभाग द्वारा इसके लिए केज कल्चर परियोजना शुरू की गई है। 3 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना केे तहत 4 मीटर गहरे, 6 मीटर लंबे और 6 मीटर चौड़े आकार के कुल 54 पिंजरों में काॅमन काॅर्प, तिलापिया और पंगेसिया मछलियों के बीज डाले गए हैं।
माही बांध में पंगेसिया मछली के बीज पहली बार मंगवाए गए हैं। जिसके पीछे प्रमुख उद्देश्य मछली पालन के लिए गठित दस सोसायटी के 1800 मछुआरों को राज्य सरकार की योजना से लाभ दिलाना है।
54 पिंजरों में मछलियों की बढ़ोतरी पर रखेंगे नजर
54पिंजरों में कामन काॅर्प, तिलापिया और पंगेसिया मछलियों की संख्या में होने वाली वृद्धि की स्थिति पर 6 माह तक नजर रखी जाएगी। इससे इस बात का पता चलेगा कि प्राकृतिक रूप से उपलब्ध खाद्य सामग्री खाने वाली मछलियों और अलग से दी जाने वाली खाद्य सामग्री खाने वाली मछलियों की तादाद में कितना अंतर आता है।
इसके लिए छत्तीसगढ़ की एबीआईएस कंपनी द्वारा उत्पादित प्लोटिंग फिश फूड का उपयोग किया जाएगा। मछलियों की बढ़ोतरी के आधार पर अगले चरण में जिले के सुरवानिया बांध, हेरो बांध, उदयपुर जिले के जयसमंद बांध और गुजरात के कडाणा बांध के बेक वाटर में तीनों प्रजाति की मछलियों की तादाद बढ़ाने के लिए केज कल्चर परियोजना को लागू किया जाएगा।
पहली बार होंगे ये काम
प्रदेश सरकार द्वारा केज कल्चर परियोजना को पूरे राज्य में सबसे पहले माही बजाज सागर बांध के बेकवाटर में लागू किया गया है। बांध में मछलीपालन को बढ़ावा देने की दृष्टि से पंगेसिया मछली के बीज भी पहली बार मंगवाए गए हैं। इससे मछलियां बढ़ेगी। योजना के सफल रहने पर लगभग 1800 मछुआरों को सीधा फायदा मिलेगा। -राधामोहनश्रीवास्तव, उपनिदेशक, मत्स्य पालन विभाग
लाखों की संख्या में डाले गए हैं बीज
कामनकाॅर्प प्रजाति की मछलियों के 6 लाख बीज। तिलापिया मछली के 5 लाख बीज।
पंगेसिया प्रजाति की मछली के 6 लाख बीज।