बांसवाड़ा. देश के बॉर्डर पर जहां आतंकवाद खतरा बना हुआ है, तो देश के अंदर नक्सलवाद की आहट आम लोगों को सोने नहीं देती। यह दोनों ही देश की सुरक्षा के लिए चुनौती बने हुए हैं। सीमा पर आजादी के बाद से लेकर अब तक पाकिस्तान से आतंकवाद चल रहा है, तो चीन भी सीमा विवाद को हथियार बनाकर हमें चुनौती दे रहा है।
ऐसे में देश की इस चुनौती का सामना जहां सेना करती है, तो आंतरिक चुनौती के लिए युवाओं को आंख और कान खोलकर सोचना चाहिए। ये विचार रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल वीएम पाटिल ने बुधवार को राजकीय गोविंद गुरु कॉलेज में छात्रों और व्याख्याताओं के बीच व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
फोरम फोर इंटीग्रेटेड नेशनल सिक्योरिटी के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रीय सुरक्षा की चेतना के विकास अभियान की शृंखला में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई की आेर से इस व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया था, जिसमें मुख्य अतिथि पाटिल थे। अध्यक्षता सुखाड़िया विश्वविद्यालय केे कुलपति प्रो. आईवी त्रिवेदी ने की। पाटील ने सांस्कृतिक संस्कारों का अनुसरण करने का आह्वान किया।
देश के युवाओं - नईपीढ़ी की सोच देश के लिए होगी तो सभी चुनौतियों का समाधान भी युवा सोच के साथ होगा।
देश की सीमाएं - फिलहालपाकिस्तान से रिश्ते ठीक नहीं है। चौकन्ना रहने की जरूरत है। चीन से भी चुनौती मिल रही है। ऐसे में हमारे कदम सोच विचार कर हो।
ये भी मौजूद रहे : अतिथियों का स्वागत कार्यवाहक प्राचार्य डाॅ. दर्शन अछपाल, एनसीसी प्रभारी कैप्टन शंकर सिंह राठौड़, एनएसएस प्रभारी डॉ . किरण पूनिया, प्रो. रामरजसिंह, छात्रसंघ अध्यक्ष दिनेशचंद्र ने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में डॉ . दिनेश द्विवेदी, डॉ. पीपी पालीवाल, डॉ . सरला पंड्या, डॉ . सीमा भूपेंद्र, डॉ. शफकत राना शामिल थे। संचालन डॉ . नरेंद्र पानेरी ने किया, जबकि प्रो.शंकर सिंह राठौड़ ने आभार जताया।
नॉलेज पार्ट
>1950 से चीन खतरा बना हुआ है। हमेशा ही चैलेंज दे रहा है। अब तक हमारी सीमा में घूस आया है।
> आईएसआईएस आतंकी संगठन की निगाहों में हमारा देश बना हुआ है। इसके लिए अभी से ही तैयारी करनी होगी।
>देश में सात राज्य ऐसे है, जहां माओवादी और नक्सलवादियों का प्रभाव है। इन्हें विदेशों से फंडिंग होती है।
> विदेशों से मिलने वाले करोड़ों रुपए के दम पर विकास को प्रभावित किया जा रहा है।