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केंद्रीय सचिवालय से छुपाए रखे मेगा प्रोजेक्ट
ऊर्जाविभाग के राज्यस्तरीय अफसरों ने बांसवाड़ा में लगने वाले सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट संबंधी जानकारी प्रधानमंत्री के वेबपोर्टल और केंद्रीय मंत्रिमंडल सचिवालय से छुपाए रखी। उन्होंने प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के वेबपोर्टल पर जानकारी नहीं डालकर नियमों की बेकद्री की है, जिससे प्रोजेक्ट में समय लग गया। इसके संबंध में जब काफी पत्र व्यवहार किया गया, तब कहीं जाकर ऊर्जा विभाग के उच्चाधिकारियों की उपेक्षित कार्यशैली पर अंकुश लगा। लेकिन, 8 माह तक उन्होंने प्रोजेक्ट की जानकारी की हकीकत को देश के प्रधानमंत्री से भी छ़ुपाया। इसके कारण प्रस्तावित पावर प्रोजेक्ट का काम अटका रहा और विकास की गति मंद हो गई।
16 सितंबर को एसई ने दी सही जानकारी
ऐसे हुआ मामले का खुलासा : सूचनाके अधिकार के तहत आरटीआई एक्टिविस्ट ट्राइबल एरिया डवलपमेंट समिति के अध्यक्ष गोपीराम अग्रवाल ने अतिरिक्त मुख्य सचिव इंफ्रा, ऊर्जा विभाग के प्रमुख शासन सचिव, विद्युत उत्पादन निगम, विद्युत प्रसारण निगम के उच्चाधिकारियों को 13 फरवरी 2014 को पत्र भेजा। जिसमें उन्होंने पावर प्रोजेक्टर मॉनिटरिंग ग्रुप की वेबसाइट पर जानकारी अंकित करने का अनुरोध किया था। जिस पर उन्होंने अावश्यक कार्रवाई नहीं की। इसकी जानकारी उन्होंने मुख्यमंत्री वसुंधराराजे को 27 अगस्त को भेजे पत्र में भी दी। जिसमें बताया कि राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लि. और राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम लि. द्वारा 8 हजार करोड़-8 हजार करोड़ के दो 1320 मेगावाट क्षमता के सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट लगाने हैं। इसके अलावा करीब 3000 करोड़ लागत की डूंगरपुर से रतलाम वाया बांसवाड़ा नई ब्रॉडगेज रेलवे लाइन बिछाने का काम भी चल रहा है। जिसकी ये दोनों कंपनियां प्रस्तावक हैं।