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रतलाम में तय की बांसवाड़ा के लिए खाद लाने की रैक
बांसवाड़ा| सरकारकी कार्ययोजना के अनुसार अगले माह में रतलाम से बांसवाड़ा के लिए रासायनिक खाद आना शुरू हो जाएगा। इसकी घोषणा संभाग के दौरे पर आई राज्य सरकार ने की थी।
जिले के किसानों को हर साल लाखों बोरी खाद की जरूरत होती है। अब तक यहां पर उदयपुर और चित्तौढग़ढ़ में लगने वाली रैक के जरिए खाद आता रहा है। दोनों ही जिले बांसवाड़ा से काफी दूर हैं। इस कारण यहां के लिए ट्रकों की समस्या रहती है। ऐसे में मप्र और गुजरात के व्यापारियों के साथ ही स्थानीय व्यापारी भी खाद के अवैध कारोबार से जुड़ जाते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बांसवाड़ा के किसानों के लिए रतलाम में खाद की रैक लगाने का निर्णय लिया था।
राज्य सरकार ने रेलवे से एक समझौता किया है। रतलाम में खाद लाने के लिए किराया भी तय कर रतलाम में स्थान का चयन भी कर लिया गया है। जहां पर बांसवाड़ा के लिए खाद उतारा जाएगा। अक्टूबर माह के दूसरे सप्ताह में उम्मीद जताई जा रही है कि बांसवाड़ा की रैक जाएगी।
जल्द जारी होंगे आदेश कृषिविभाग के उपनिदेशक भूरालाल पाटीदार ने बताया कि जगह और ठेकेदार की नियुक्त हो गई है। आने वाले माह में रैक लग जानी चाहिए। आदेश एक दो दिन में जारी हो जाएंगे।
हर वर्ष लंबी लाइनें अभीतक का रिकाॅर्ड रहा है कि यूरिया खाद के लिए बांसवाड़ा में लंबी लाइन लगती आई हैं। हर वर्ष कलेक्टर को बैठक बुलाई होती थी। इसके बाद भी मांग के अनुरूप खाद कभी नहीं मिलता था। लैंप्स खाद के लिए तरसते थे और निजी व्यापारियों के खाद की आपूर्ति भरपूर होती थी। इसका सबसे अच्छा उदाहरण, कलेक्ट्रेट परिसर के निकट की क्रय विक्रय सहकारी समिति अन्य दुकानें हैं। यहां की दुकानों पर यूरिया अन्य खाद बिक रहा होता था, जबकि क्रय विक्रय सहकारी समिति पर किसानों की लंबी लाइन लगी रहती थीं।
50 हजार एमटी की जरूरत जिलेके किसानों को करीब 50 हजार एमटी खाद की जरूरत हर वर्ष होती है। सरकारी रिकाॅर्ड के अनुसार करीब 25 हजार एमटी यूरिया पांच हजार एमटी अन्य खाद चाहिए। हकीकत में इससे अधिक खाद की जरूरत होती है।