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मोहल्ले को सुधारें, वार्ड और शहर अपने आप सुधर जाएगा

7 वर्ष पहले
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वार्ड 22 की पार्षद गायत्री शर्मा : लोगअगर जागरूक होंगे तो पार्षद को काम करना ही पड़ेगा। मोहल्ले को सुधारेंगे तो वार्ड के साथ ही शहर भी अपने आप सुधर जाएगा। सफाईकर्मी जिम्मेदारी समझकर काम नहीं कर रहे, जिन्हें नगर परिषद को पाबंद करना चाहिए। सड़कें गुणवत्तायुक्त नहीं बनने से किनारे कट जाते हैं। नाली से नाली तक सड़क बनाई जाए तो यह समस्या नहीं रहेगी। शहर में संध्याकालीन चाट-पकौड़ी का बाजार विकसित होना चाहिए।

लोग जागरूक होंगे तो पार्षद काम करेगा

योजना एवं वास्तुकला विद्यालय नई दिल्ली के विद्यार्थियों के ग्रुप के साथ आई संतोष चौधरी नेहा त्रिपाठी ने सुझाव दिया कि बांसवाड़ा में काफी संभावनाएं हैं। यह राजस्थान का ऐेतिहासिक शहर होने के साथ यहां पानी के स्त्रोत भरपूर हैं। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य सहजता से सभी को मोहित कर लेता है। ऐसे में बांसवाड़ा को दिल्ली, उदयपुर आदि की नकल करने की बजाए बांसवाड़ा मॉडल विकसित करना चाहिए और बांसवाड़ा की पहचान बांसवाड़ा के रूप में ही हो। यहां के जंगलों पानी के स्त्रोतों के रखरखाव की आवश्यकता है।

छात्रशुभम खेतान- खुदजिम्मेदार बनें, दूसरे पर दोष डालें। तालाबों में कचरा नहीं डालें तो वे साफ ही रहेंगे।

छात्रसावन अजीज - थर्मलपावर और न्यूक्लीयर पावर जैसे प्रोजेक्ट यहां रहे हैं तो इनमें स्थानीय युवाओं को रोजगार दिलाने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसको लेकर युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए वोकेशनल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट खोले जाने चाहिए।

नकल करने की बजाय शहर को बनाएं बांसवाड़ा मॉडल

कवि जलज जानी ने कविताओं शेर के माध्यम से संचालन करते हुए कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। उन्होंने शहर की आंख में आंसू भरे हैं, हमारे गांव जिस दिन से मरे हैं, और आज एक मकसद बनाकर आप खुद चल दीजिए, कल पलटकर देखिए एक कारवां हो जाएगा, सरीखी रचनाएं पेश की।

शहर की आंख में आंसू भरे हैं

वार्ड 21 के पार्षद तुफैल अहमद ने कहा- पार्षदोंके काम का भी हिसाब लिया जाना चाहिए कि उन्होंने क्या किया और क्या रह गया। वार्डवासियों और पार्षदों के आपसी संवाद की दृष्टि से महत्वपूर्ण होने के कारण रूबरू कार्यक्रम प्रति वर्ष करने की आवश्यकता जताई। इससे लोग अपनी समस्या सहजता से पार्षद के समक्ष रख सकेंगे। वार्ड में सड़क की समस्या 90 प्रतिशत दूर हो चुकी है। ऊंचाई का क्षेत्र होने से पानी की समस्या अभी