बांसवाड़ा. भारतीय खाद्य निगम के करोड़ों रुपए का गेहूं रामभरोसे है। इसकी देखभाल के लिए कोई भी अधिकारी मौके पर तैनात नहीं रहते। माहीडैम रोड पर स्थिति वेयर हाउस में करोड़ों रुपए का गेहूं रखा गया है। लेकिन यहां पिछले एक माह से प्रबंधक और लगभग इतने ही दिनों से सहायक प्रबंधक देखभाल के लिए नहीं आए।
निगम की ओर से खुले स्थान पर गेहूं रखने पर रोक लगाने के बाद स्टेट वेयर हाउस में हजारों टन गेहूं रखा जा रहा है। वेयर हाउस की ओर से यहां पर एक प्रबंधक, कनिष्ठ सहायक, गार्ड और चौकीदार को नियुक्त किया है। स्टेट वेयर हाउस का ही घलकिया में भी गोदाम है। यहां के गोदाम पर केवल एक प्रभारी लगाया हुआ है। बीते माह वेयर हाउस में कार्यरत प्रबंधक का डूंगरपुर में स्थानांतरण हो गया।
विभाग की ओर से यहां पर आरसी गाेयल को लगाया था। उन्होंने यहां पर ज्वॉइनिंग ले ली। लेकिन बताया जा रहा है कि ज्वॉइनिंग लेने के बाद भी डूंगरपुर गए अधिकारी से कार्यभार नहीं लिया। यानी कि आधा अधूरा कार्यभार ग्रहण किया।
गए कनिष्ठ सहायक :
दाे दिन पहले जब रतलाम से आए गेहूं में कचरे का मामले सामने आया तो अचानक से कनिष्ठ सहायक गए। एक कार्मिक ने बताया कि बाबूलाल बुनकर छह दिसंबर से वेयर हाउस में नहीं आए थे। अचानक 10 दिसंबर को शाम को साढ़े चार बजे आए। दो दिन की सीएल लगाई और हस्ताक्षर किए और लीव भी लगाई।
इसके बाद में ही 13 दिसंबर को नजर आए। इस संबंध में हमने आरसी गोयल और बीएल बुनकर दोनों से बात करने की कोशिश की, लेकिन दोनों में से किसी का भी पक्ष नहीं मिल सका। पूरे मामले को लेकर सीएमडी डॉ. ललित मेहरा ने बांसवाड़ा के हालात जानकर कार्रवाई करने की बात कहीं है।
11 से 21 नवंबर तक टूर, इसके बाद कोई पता नहीं
आरसी गाेयल ने 10 नवंबर तक के रजिस्टर में चार दिन हस्ताक्षर किए हुए हैं। इसके बाद से 11 से 21 तक का टूर के नाम से रजिस्टर में टी लगाया हुआ है। फिर 22 नवंबर से रजिस्टर खाली पड़ा है। यहां पर कार्यरत किसी भी कर्मचारी को इसकी जानकारी नहीं है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक व्यक्ति ने बताया कि नवंबर पर साहब आए थे, तीन चार दिन के हस्ताक्षर कर चले गए।
नवंबर और दिसंबर माह के रजिस्टर। जहां हस्ताक्षर के कॉलम खाली पड़े है। यह फोटो रविवार को दोपहर 12 बजे लिए गए है।