बांसवाड़ा। महात्मा गांधी अस्पताल में रोगियों और उनके परिजनों के लिए सलाह केंद्र तो बना दिया, लेकिन यहां से सलाहकार नदारद है। घंटों खड़े रहने के बाद भी यहां पर सलाह देने वाला कोई नहीं मिलता। ऐसे में लोगों काे अस्पताल संबंधित जानकारी लेने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है।
अधिकतर समस्या ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोगों को रहती है। उनका कई घंटे तो जानकारी पता लगाने में ही लग जाते है। जैसे-तैसे कोई जानकारी जुटाते है तो डॉक्टरों के जाने का टाइम हाे जाता है। फिर पांच मिनट की जांच करवाने के लिए पूरा दिन बिगड़ता है। ऐसे में मानसिक परेशानी तो होती ही है साथ ही आर्थिक भार भी बढ़ जाता है। क्योंकि समय रहते जांच नहीं होने पर ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग मजबूरन निजी अस्पतालों में इलाज करवाने चले जाते है।
सलाह केंद्र बना दिया, पर सलाहकार रहते हैं नदारद: जिला अस्पताल में रोगियों और परिजनों को नहीं मिलती जानकारी, परेशानी के कारण समय पर नहीं करवा पाते इलाज एमजीएच में शनिवार को बंद पड़ी रोगी सलाहकार की खिड़की।
''रोगी सलाहकार केंद्र में दो कर्मचारी नियुक्त है। उसमें एक निजी कारणों से अवकाश पर है। वहीं दूसरा कार्मिक 24 घंटे मौजूद नहीं रह सकता है। मरीजों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए इस समस्या का शीघ्र ही निराकरण किया जाएगा। -एलसी मईडा, पीएमओएमजी अस्पताल बांसवाड़ा।
इसलिए जरूरत सलाह केंद्र की: सलाह केंद्र से ही रोगियों और उनके परिजनों को वार्ड, डॉक्टर के बैठने का स्थान, लैब आदि की जानकारी मिलती है। बड़ा अस्पताल होने के कारण यहां लोगों को कक्ष ढूंढने में समस्या आती है। ऐसे में सलाह केंद्र से ही उसकी जानकारी लेने की व्यवस्था रहती है।
सलाहकार बने मर्जी के मालिक : इतने बड़े अस्पताल में कौन कब आता है और कब जाता है।, यह जय नहीं है। जब उचित लगा पहुंच गए ड्यूटी पर। अस्पताल से सूत्रों ने बताया कि सलाहकार केंद्र में दो कर्मचारी नियुक्त है। जिनका कोई टाइम फिक्स नहीं है। वे अपनी सुविधा के अनुसार हॉस्पिटल में ड्यूटी कर चले जाते है। जिससे कई लोग रोगी सलाहकार खिड़की पर आते है और बीना सलाह प्राप्त किए निराश होकर लौट जाते है।