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शहर में खोला जा सकता है विज्ञान तकनीकी केंद्र

7 वर्ष पहले
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शहरमें विज्ञान तकनीकी केंद्र कम साइंस स्कूल खोला जा सकता है। इसकी पहली पहल माध्यमिक शिक्षा विभाग के एडीईओ मोहनलाल निनामा ने की है। उन्होंने इसका सुझाव सूचना और विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग को दिया है। शिक्षा विभाग के साथ मिलकर विज्ञान के क्षेत्र में काम करने वाला यह विभाग सेंटर की स्थापना कर सकता है।

हालांकि पहले भी प्रारंभिक स्तर के प्रस्ताव भेजे गए हैं, लेकिन बाद में सरकार बदल गई है, इसलिए पहले के प्रस्ताव की किसी को जानकारी नहीं है।

सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के दौरान कलेक्टर और विभागीय अफसरों की बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई। निनामा ने प्रजेंटेशन देकर इसकी उपयोगिता की जानकारी दी थी। वे फिर से इसका प्रस्ताव बनाने में जुटे हैं, ताकि विभाग को भेजकर इस दिशा में काम हो सके।

जिले में अभी 15 स्कूलों में विज्ञान वर्ग संचालित है। इसमें लगभग एक हजार विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। साथ ही 1000 से ज्यादा बच्चे प्रतिवर्ष दूसरे शहर में विज्ञान विषय की पढ़ाई करने जाते है। 12वीं कक्षा के बाद इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाने के उत्सुक बच्चे बड़ी मात्रा में कोटा जाते है। निनामा ने पूरा प्रस्ताव बनाकर विभाग को प्रस्तुत करेंगे।

अभी यह है विज्ञान की स्थिति

एडीईओ मोहनलाल निनामा बताते हैं कि यहां 60 फीसदी लोग कृषि करते हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, माही डैम, चारों ओर पहाड़ी-प्राकृतिक वातावरण होने से अध्ययन में तमाम जानकारी मिल सकती है, जो इस सेंटर में पढ़ने वालों को जरूरी होती है।

बांसवाड़ा इसलिए अनुकूल

यह है सेंटर कम स्कूल का काॅन्सेप्ट

राज्यके कुछ शहरों में साइंस सेंटर बनाए गए हैं। यहां किसी बड़े स्कूल को साइंस स्कूल या साइंस सेंटर के नाम से बनाया जा सकता है। इसमें शिक्षा और विज्ञान विभाग साइंस से जुड़ी हुई सुविधाएं दिलाते हैं। इस काॅन्सेप्ट के स्कूलों में प्रवेश जिला मेरिट के आधार पर 11वीं कक्षा के बाद प्रवेश होता है। इसका उद्देश्य विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की तमन्ना रखने वाले विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करना है। भौगोलिक क्षमता को देखा जाए तो नूतन स्कूल को केंद्र बनाया जा सकता है।