सुविधाओं का अभाव रैफर करना मजबूरी
जिलेभरमें होने वाली छोटी-मोटी दुर्घटनाओं में मरीजों को इलाज के लिए शहर के महात्मा गांधी अस्पताल में लाया जाता है। सबसे बड़े अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और सुविधाओं के अभाव में मरीजों को रैफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बन गया है। अस्पताल में डॉक्टरों के रिक्त पदों की समस्याएं काफी लंबे से रही है। इस संबंध में पिछले माह दौरे पर आए चिकित्सामंत्री राजेंद्र राठौड़ सहित अन्य मंत्रियों को भी अवगत कराया जा चुका है। जनसुनवाई में इस समस्या को उठाया गया, लेकिन अब तक पदाें को भरने और संसाधनों की उपलब्धता के कोई प्रयास नहीं होने का खामियाजा सीधे तौर पर आमजन को उठाना पड़ रहा है।
इस साल जिला अस्पताल से काफी संख्या मंे मरीजों को रैफर किया गया। जिसमें जनवरी में 17, फरवरी-26, मार्च-29, अप्रैल-21, मई-46, जून-22, जुलाई-32, अगस्त- 29 तथा सितंबर माह में (27 तारीख तक) 17 मरीजों को रैफर किया गया। इस कारण मरीजों और परिजनों को काफी दिक्कतें होती हैं।
माहवार रैफर के आंकड़े
इस साल जनवरी से लेकर अब तक 270 दिनाें में शहर और देहात से आए 239 एक्सीडेंटल कैस ट्रोमावार्ड से रैफर किए गए। इसमें अधिकांश फ्रैक्चर और हेड इंजरी के केस शामिल है। इसका कारण इतने बड़े अस्पताल में न्यूरोसर्जन और ऑर्थोसर्जन की कमी है।
^सीमित संसाधन और सुविधाओं में भी बेहतर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ज्यादातर केस हेड इंजरी के होते हैं। यदि सीटी स्केन की 24 घंटे सुविधा और टेक्नीशियनों की कमी को पूरा किया जाए तो रैफर केस में काफी कमी सकती है, जिससे मरीजों के परिजनों को सभी सुविधाएं मिल सकती है।\\\'\\\' -डॉ.हितेन व्यास, एमएस,महात्मा गांधी अस्पताल
ट्रोमा वार्ड से 270 दिनों में 239 रैफर