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नगर परिषद ने नहीं दिए तो युवाओं ने बांटे बाजार साफ रखने को डस्टबिन
शहरको स्वच्छ रखने के लिए नगर परिषद ने अपने पास मंगाए गए कचरा-पात्र ढाई माह बाद भी नहीं रखवाए तो कुछ युवाओं ने अपनी जिम्मेदारी समझी और डस्टबिन मंगवाकर एक बाजार में दुकानों के आगे रखवा दिए। दैनिक भास्कर के अभियान बदलाव मिलजुलकर का असर दूसरे दिन ही देखने को मिला।
शहर में सोमवार शाम को बदलाव मिलजुलकर अभियान के समर्थन में न्यू उत्सव फाउण्डेशन के पदाधिकारियों ने चंद्रपाेल गेट क्षेत्र में व्यापारियों को डस्टबिन बांटे। इस दौरान फाउंडेशन के हितेष पटेल, निखिल सारगिया, विशाल दोसी, अनूप पटेल, सुनील मेहता, सनत जैन, कल्पेश पंचाल, कपिल मेहता ने व्यापारियों से पात्र मेें ही कचरा डालने का आग्रह किया।
आमतौर पर दुकानदारों और मकानों में रहने वाले लोगों द्वारा सफाई कर कचरा बाहर डाल दिया जाता है। जो पूरे दिन सड़क पर पड़ा रहता है। इससे दिन भर शहर की सड़कें कचरे से अटी दिखाई देती है। इससे शहर की सुंदरता भी प्रभावित होती है। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष उमेश पटियात कहते हैं कि सफाईकर्मी सुबह सफाई करके चले जाते हैं। इसके बाद कचरा-मलबा सड़कों के किनारे डलता है। सफाई से निकलने वाले कचरे को कचरा पात्र में रखवाने और दोपहर बाद विशेष दल द्वारा कचरा एकत्रित करना शुरू करने से ही शहर में सफाई नजर सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि मोहन कॉलोनी से उदयपुर रोड पर और मोहन कॉलोनी चौराहे से दाहोद रोड पर दोनों किनारों पर नाली तक डामर सड़क बनाकर सड़क पर उड़ने वाले धूल के गुबारों वाली स्थिति से छुटकारा पाया जा सकता है।
येभी समाधान
सफाईव्यवस्था को संगठित और असंगठित, दो क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। संगठित क्षेत्र में सभी सरकारी अर्द्धसरकारी आॅफिस आदि शामिल किए जा सकते हैं। यहां की सफाई की जिम्मेदारी वहां के विभागाध्यक्ष को लेते हुए नियमित निरीक्षण अनिवार्य कर देना चाहिए। असंगठित क्षेत्र में निजी प्रतिष्ठान, दुकानें आदि शामिल हैं, इसके अलावा मोहल्ले कॉलोनियों में मकान हैं। यहां कचरा सड़कों-गलियों की जगह तय स्थल या कचरापात्र में डालने की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू की जा सकती है। शहर को स्वच्छ रखने का अभियान यूं भी नगर परिषद के जिम्मे ही नहीं है, आम जनता को भी इसमें आगे आने और अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है।
सिटी रिपोर्टर| बांसवाड़ा
शहरको स्वच्छ रखने के लिए नगर परिषद ने अपने पास मंगाए गए कचरा-पात्र ढाई माह बाद भी नहीं रखवाए तो कुछ युवाओं ने अपनी जिम्मेदारी समझी और डस्टबिन मंगवाकर एक बाजार में दुकानों के आगे रखवा दिए। दैनिक भास्कर के अभियान बदलाव मिलजुलकर का असर दूसरे दिन ही देखने को मिला।
शहर में सोमवार शाम को बदलाव मिलजुलकर अभियान के समर्थन में न्यू उत्सव फाउण्डेशन के पदाधिकारियों ने चंद्रपाेल गेट क्षेत्र में व्यापारियों को डस्टबिन बांटे। इस दौरान फाउंडेशन के हितेष पटेल, निखिल सारगिया, विशाल दोसी, अनूप पटेल, सुनील मेहता, सनत जैन, कल्पेश पंचाल, कपिल मेहता ने व्यापारियों से पात्र मेें ही कचरा डालने का आग्रह किया।
आमतौर पर दुकानदारों और मकानों में रहने वाले लोगों द्वारा सफाई कर कचरा बाहर डाल दिया जाता है। जो पूरे दिन सड़क पर पड़ा रहता है। इससे दिन भर शहर की सड़कें कचरे से अटी दिखाई देती है। इससे शहर की सुंदरता भी प्रभावित होती है। नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष उमेश पटियात कहते हैं कि सफाईकर्मी सुबह सफाई करके चले जाते हैं। इसके बाद कचरा-मलबा सड़कों के किनारे डलता है। सफाई से निकलने वाले कचरे को कचरा पात्र में रखवाने और दोपहर बाद विशेष दल द्वारा कचरा एकत्रित करना शुरू करने से ही शहर में सफाई नजर सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि मोहन कॉलोनी से उदयपुर रोड पर और मोहन कॉलोनी चौराहे से दाहोद रोड पर दोनों किनारों पर नाली तक डामर सड़क बनाकर सड़क पर उड़ने वाले धूल के गुबारों वाली स्थिति से छुटकारा पाया जा सकता है।
येभी समाधान
सफाईव्यवस्था को संगठित और असंगठित, दो क्षेत्रों में बांटा जा सकता है। संगठित क्षेत्र में सभी सरकारी अर्द्धसरकारी आॅफिस आदि शामिल किए जा सकते हैं। यहां की सफाई की जिम्मेदारी वहां के विभागाध्यक्ष को लेते हुए नियमित निरीक्षण अनिवार्य कर देना चाहिए। असंगठित क्षेत्र में निजी प्रतिष्ठान, दुकानें आदि शामिल हैं, इसके अलावा मोहल्ले कॉलोनियों में मकान हैं। यहां कचरा सड़कों-गलियों की जगह तय स्थल या कचरापात्र में डालने की व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू की जा सकती है। शहर को स्वच्छ रखने का अभियान यूं भी नगर परिषद के जिम्मे ही नहीं है, आम जनता को भी इसमें आगे आने और अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है।
नगर परिषद की व्यवस्था
20टन - उठता है प्रतिदिन का कचरा।
संसाधन- 4 ट्रैक्टर और एक जेसीबी।
256- सफाईकर्मी हैं।
बाजार में दुकानों के आगे रखने को उत्सव फाउंडेशन की ओर से बांटे गए डस्टबिन।