संतति की अभिलाषा ही संपत्ति: शास्त्रीजी
बांसवाड़ा|ब्रह्मपुरी वाड़ियाकॉलोनी में प्रारंभ हुई भागवत कथा कार्यक्रम में प्रवचन देते हुए प्रमोद भाई त्रिवेदी मुंबई वाले ने कहा कि संतति की अभिलाषा ही संपत्ति है। लेकिन ये संस्कार नहीं है। उन्होंने कहा कि आत्म कल्याण के लिए कलयुग में भागवत कथा श्रवण से उपयुक्त कोई दूसरा साधन नहीं है।
शाश्वत मृत्यु के चिंतन से इस लोक को सुधारने की विस्तृत व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि घर में बेटियों और गाय के प्रारब्ध का नियंता माता-पिता तथा गाय के मालिक को बताया। हरि स्मरण को कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग बताते हुए शास्त्रीजी ने कहा कि ये सभी मार्गों में श्रेष्ठ है। इस अवसर पर नगर परिषद सभापति मंजूबाला पुरोहित, पं.लक्ष्मीनारायण शुक्ल, चंद्रकांत पाठक, यजमान पार्वती त्रिवेदी, प्रवीण, कल्पना पाठक, मीत, भूपेश जोशी, दिनेश त्रिवेदी, सुरेश त्रिवेदी, प्रभाशंकर जोशी मौजूद रहे। संचालन डॉ. पीयूष जोशी ने किया। आभार यशवंत जोशी ने माना।