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शिक्षक लगाते नहीं, स्कूलों में जांच पर लाखों रुपए खर्च

6 वर्ष पहले
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एजुकेशन रिपोर्टर | बांसवाड़ा

राज्यप्रारंभिक शिक्षा परिषद के निर्देश पर 70 अफसर एक दिन में बुधवार को 70 स्कूलों की जांच करेंगे। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान लाखों रुपए की राशि खर्च कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि अब तक 5 बार अभियान चल चुका है और इनपुट कुछ निकलता नहीं है।

बांसवाड़ा में एक अफसर पर औसत 800 से 1000 रुपए खर्च हो रहा है। ऐसे ही 5 बार के अभियान में भी राशि खर्च हो चुकी है। एक ओर तो स्कूलों में शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली चल रहे हैं, फिर इस खर्चे के अलावा अन्य कोई प्लान नहीं हो सकता है। एडीपीसी उमेश अधिकारी ने बताया कि निर्देशानुसार 11 से 13 फरवरी के बीच में यह अभियान चलाना है। इसके लिए स्कूल तय कर दिए हैं।

ऐसे समझें- 70 अफसरों पर औसत 70 हजार रुपए

एकअफसर फील्ड में स्कूल जांच के लिए जाते हैं तो अपना वाहन होता है। अफसर को दिन का वेतन, डीए, टीए सरीखी सुविधाएं मिलती है। एक बार के अभियान में 70 हजार रुपए की राशि सभी विभागों की मिलकर खर्च हो रही है। पांच अभियान की राशि देखे तो 3.5 लाख रुपए होते हैं। यदि पूरे प्रदेश में देखा जाए तो लाखों रुपए केवल अभियान में खर्च हो रहे हैं।

होताकेवल यही

{इन अभियान में एक सेट फारमेट होता है। जिसे स्कूल में किसी शिक्षक को दे दिया जाता है जो प्रारूप भर देता है। इस दौरान फार्मेलिटी के लिए अफसर बच्चों से बात कर लेते हैं।

{ अपनी रिपोर्ट में स्कूल की स्थिति को संतोषप्रद बताया जाता है, या फिर पढ़ाई को न्यून बताकर अपनी रिपोर्ट विभाग के लिए भेज दी जाती है।

{ सभी अफसरों की रिपोर्ट को ऑनलाइन कर विभाग को भेजते है। जिला लेवल पर रिपोर्ट का कुछ अधिकारी मिलकर विश्लेषण करते हैं और अपनी रिपोर्ट देते है।

{ कुछ समय बाद रिपोर्ट आती है। जिसमें इस जिले के बच्चे अंग्रेजी, हिंदी, गणित, विज्ञान में कमजोर हैं, इस पर ध्यान देने की जरूरत लिखा जाता है।

{ बाद में विभाग रीडिंग कैंपेन की कक्षाएं लगवाता है, लेकिन शिक्षकों के अभाव में स्थिति जैसी थी, ठीक वैसी ही वापस हो जाती है। इसी तरह से आखिर अभियान खत्म हो जाता है।

शिक्षकोंके 2098 पद रिक्त

शिक्षाविभाग प्रारंभिक की रिपोर्ट के अनुसार बांसवाड़ा में शिक्षक, मंत्रालयिक कर्मचारी सहित 10 हजार 634 पद स्वीकृत हैं। इसमें से केवल 8 हजार 536 पद भरे हुए हैं और 2098 पद खाली हैं। इनमें से 328 स्कूलों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं, तो 562 पद शिक्षकों के रिक्त हैं। ऐसे ही तृतीय श्रेणी के 1047 पद खाली हैं। इन पदों को नहीं भरा जाता है, तब तक ऐसे अभियान का नतीजा नहीं पाएगा।