इस स्थिति से निबटने के लिए बाजारों में डस्टबिन रखवाए जाएंगे और कुछ सफाई कर्मचारियों के साथ कचरा ले जाने वाला ऑटो भेजा जाएगा। ऐसा करने से शहर का बाजार और अधिक साफ सुथरा नजर आएगा। उन्होंने बताया कि यदि इसमें व्यापारी कुछ अंशदान दें तो व्यवस्था को सुचारू किया जा सकता है। क्योंकि इसके लिए अतिरिक्त कर्मचारी रखने पड़ेंगे। वहीं व्यापारियों ने भी इस बात पर सहमति जताई है और सहयोग देने का वादा किया है।
व्यापारी देवकीनंदन नागर ने कहा कि पहले दिन में एक बार सफाई होती थी, जो अब नाकाफी है। बाजार खुलने पर सफाई बाद कचरा होना स्वाभाविक है। नगर परिषद रोजाना सफाई करवाए तो शहरवासियों को राहत मिलेगी।
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मोबाइल के व्यापारी वीरेंद्र गांधी ने बताया कि कचरा फैला रहना बड़ी समस्या है। कचरा पात्र बांटने का अभियान वैचारिक परिवर्तन वाला है। इससे लोग कचरे को सिर्फ कचरा-पात्र में ही डालेंगे और सफाई कर्मचारियों द्वारा कचरा ले जाया जाएगा।
व्यापारी विनोद पारीख ने कहा कि कचरे और गंदगी के कारण संक्रमण बढ़ रहा है। ऐसे में शहर को साफ रखने के प्रयासों का व्यापारी वर्ग और शहरवासी दिल से स्वागत करते हैं।
कपड़ा व्यापारी अल्पेश जैन ने कहा कि व्यापारियों के सामने दिन में होने कचरे के निस्तारण की बड़ी समस्या है। वे अपने बाजार में कचरा नहीं होने देंगे, जिससे व्यापारियों को राहत मिलेगी।
व्यापारी राजेंद्र पारीख ने कहा कि बढ़ता संक्रमण सभी के लिए गहरी चिंता का विषय है। अब शहर की सफाई के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई लोगों को स्वीकार्य नहीं है। व्यापारी चाहते हैं कि शहर और बाजारों की सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाए।
बांसवाड़ा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के सचिव और प्रवक्ता शैलेंद्र वोरा ने कहा कि शहर में व्यापारिक गतिविधियों को सफल बनाने के लिए सफाई होना मुख्य मुद्दा है। सुबह 10 बजे तक प्रतिष्ठान खुलने के बाद कचरे का निस्तारण करना व्यापारियों के लिए समस्या हो जाती है। वे कचरा करेंगे और होने देंगे।