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कामना पूरी तो लोभ और नहीं हुई तो क्रोध : रासेश्वरी देवी
कुशलबाग में कृपालु महाराज की शिष्या ने की सुख-दुख की व्याख्या
बांसवाड़ा| कामनाकी पूर्ति पर लोभ और पूरी नहीं हुई तो क्रोध उत्पन्न होता है। यह विचार कुशलबाग मैदान में कृपालु महाराज की शिष्या और प्रमुख प्रचारिका रासेश्वरी देवी ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि संसार में सुख है दु:ख है। इस गुरुत्वपूर्ण सिद्धांत की व्याख्या के लिए देवी ने कई उदाहरण प्रस्तुत किए और कहा कि संग और संस्कारवश हमें जो व्यक्ति या वस्तु मिल जाती है, उसे ही हम सुख मान लेते हैं। साथ ही अपने माने हुए सुख का बार-बार चिंतन करते हैं। इसी से उस व्यक्ति या वस्तु में हमारी आसक्ति हो जाती है। वहीं, मन में बार-बार कामना पैदा होती है। सुख मानना हमारा स्वभाव है। वास्तव में संसार में मिलने वाला सुख वास्तविक सुख नहीं है। दु:ख की मात्रा कम होने को हम सुख मानते हैं। संसार में किसी वस्तु की प्राप्ति के पहले हमें हर वस्तु में सुख का अनुभव हाेता है। किंतु वस्तु मिलने के बाद सुख कम हो जाता है। जब मानव इस बात को समझ जाता है कि संसार में सुख है दु:ख है, तो उसका मन स्वतः संसार से हट जाता है और वैराग्य युक्त हो जाता है।