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खांदू गांव के नाम से ही पड़ा खांदू कॉलोनी चौराहा

7 वर्ष पहले
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माहीडैमनिर्माण के दौरान डूब क्षेत्र में आने पर खांदू गांव को शहर के निकट बसाया गया। इसी के नाम पर कॉलोनी का चौराहा खांदू कॉलोनी चौराहे के नाम से जाना जाता है। जब माहीडैम का निर्माण हुआ था, तब माही नदी के बेसिन में और वाकड़, बदरेल, खांदू नाले से घिरे होेने की वजह से पूर्व में इसे खांदू गांव कहा जाता था। बाद में जब माहीडैम बना तो, तत्कालीन मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी की पहल पर इस गांव को सिंटेक्स के ठीक सामने बसाया गया। दूसरी ओर इस गांव की पहचान आज भी स्वागत द्वार के रूप में है। गांव को बसाने की प्रक्रिया का शिलान्यास तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने किया था।

वहीं स्वागत द्वार के दोनों ओर इसकी जानकारी वाली पट्टी भी लगी हुई है। हालांकि स्वागत द्वार के रखरखाव के अभाव में अब जीर्ण शीर्ण होता जा रहा है। इस द्वार का शिलान्यास 5 फरवरी 1975 को किया था। अब शहर की नगर परिषद से जुड़ी यह कॉलोनी शहर की सबसे बड़ी कॉलोनी के रूप में जानी जाती है।

आजीविका का साधन बना आबापुरा क्षेत्र

खांदूकॉलोनी में निवास करने वाले अधिकांश परिवारों के लिए आजीविका का साधन आज भी आबापुरा क्षेत्र है। क्योंकि बताया जाता है कि पहले खांदू गांव भी आबापुरा के निकट ही था। ऐसे में लोगाें का व्यापारिक जुड़ाव आज भी देखा जाता है। वरिष्ठ नागरिक सुखलाल कलाल कहते है कि अधिकांश व्यापारियों का व्यापारिक संबंध आबापुरा से ही है। दूसरी ओर सबसे ज्यादा विकसित कॉलोनी के रूप में भी खांदू कॉलोनी का नाम जाना जाता है।