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दायरे में 292 स्कूल, लेकिन फीस में सबकी मनमर्जी
निजीस्कूलों की फीस निर्धारण को लेकर राज्यस्तर पर बनाई कमेटी ने जिले में 292 स्कूलों को दायरे में लिया है। इन सभी स्कूलों को नोटिस भी जारी किए हैं, लेकिन नीतिगत तौर पर फीस निर्धारण नहीं हो पाया। इसमें अभी स्कूल संचालकों की अपनी मनमर्जी चलती है। राज्यस्तरीय कमेटी ने इन स्कूलों को नोटिस थमाकर फीस को लेकर जवाब मांगा है, परंतु जो फीस तय की जानी थी, उसमें से बांसवाड़ा जिले को दायरे से बाहर रखा है। विभाग के अनुसार अभी तक जिले में समिति की ओर से किसी भी स्कूल की फीस तय नहीं की है।
शिक्षा विभाग ने फीस तय करने को लेकर राज्य स्तर पर फीस निर्धारण कमेटी का गठन किया है। इसके अध्यक्ष जस्टिस शिवकुमार शर्मा हैं। इस समिति ने पूरे राज्य में ज्यादा फीस वाली या जहां बढ़ाई जाती है, ऐसी स्कूलों को सूचीबद्ध कर उन्हें नोटिस जारी कर दिया है। दूसरी ओर नोटिस के बाद इन स्कूलाें जवाब भेजा या नहीं, इसकी जानकारी भी स्थानीय शिक्षा विभाग के पास नहीं है।
जवाब देने के लिए एक माह का समय
शिक्षाविभाग में आरटीई इंचार्ज सूरज पाटीदार ने इस मामले को लेकर बताया कि जिन स्कूलों को नोटिस देने थे, उन्हें तामील करा दिया गया है। हालांकि उन स्कूलों के द्वारा कोई जवाब दिया गया है कि नही, इसकी जानकारी हमें नहीं है, क्योंकि जवाब सीधे ही पेश करना था। इसके लिए नोटिस तामील कराने की तिथि से लेकर एक माह का समय दिया गया है।
किसी स्कूल में 30 हजार से ज्यादा तो कहीं 10 हजार से कम है फीस
निजीस्कूलों की फीस को लेकर स्थानीय शिक्षा विभाग के पास जो जानकारी है, उसके अनुसार कुछ बड़े स्कूल ऐसे हैं, जहां नर्सरी से लेकर 5वीं तक के बच्चों की फीस सालाना 30 हजार रुपए से ज्यादा है, लेकिन कुछ स्कूल ऐसे भी हैं, जिनकी फीस सालाना 10 हजार से कम है। ऐसे में निजी स्कूलों की फीस को लेकर काफी असमानता है। शुरू में यह उम्मीद थी कि इस असमानता को काफी हद तक यह समिति दूर करेगी, लेकिन अब तक ऐसा कुछ हुआ नहीं है।
9400 रुपए सरकारी फीस
समितिने सामान्य तौर पर शिक्षा के अधिकार कानून के तहत जो फीस तय की है, वह 9400 रुपए है। जिसको लेकर निजी स्कूल संगठनों ने पहले भी ज्ञापन देकर बहुत कम बताया था। दूसरी ओर इस मामले को लेकर निजी स्कूलाें की राज्य स्तरीय संगठन ने जस्टिस शर्मा से मुलाकात कर अपनी राय रखी है। हालांकि समिति को अध्यक्ष शर्मा ने स्पष्ट कर