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डूबे हॉस्टल में पानी का करंट, जीने की आस थी खत्म
हमाराकॉलेज चारों तरफ पानी से डूबा हुआ था। यहां तक कि कॉलेज की पहली विंग में डल झील का पानी घुस गया था। हम लोग दूसरे और तीसरे फ्लोर के सिविल डिपार्टमेंट में रुके हुए थे। पहला दिन तो जैसे-तैसे निकाला, लेकिन दूसरे दिन हमारे कॉलेज के एक प्रोफेसर की पानी में करंट फैलने से मौत हो गई तो हम सब घबरा गए। हमारी घबराहट को देखकर आर्मी ने हमें एक दिन के लिए जम्मू विश्वविद्यालय में ठहराया।
अपनी नजरों के सामने जम्मू और कश्मीर में बाढ़ के खौफनाक मंजर देखकर अपने घर लौटे बांसवाड़ा की खांदू कॉलोनी निवासी रवि मीणा ने सोमवार रात को भास्कर के साथ कश्मीर के हालात बयान किए। रवि को अभी भी अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा है कि वह सकुशल अपने घर पहुंच गया है। रविवार को आर्मी के प्लेन से दिल्ली आए और सोमवार सुबह बांसवाड़ा पहुंचे रवि मीणा अभी भी कश्मीर के नाम पर सहम जाते हैं। रवि के पिता रामेश्वरलाल मीणा पटवारी हैं।
एक माह पहले ही एनआईटी श्रीनगर में इंजीनियरिंग करने के लिए गए रवि वहां कॉलेज कैंपस के हॉस्टल में रहते थे। उनके अनुसार लगभग 8 दिन पहले लगातार तीन से चार दिन तक मूसलाधार बारिश होती रही और श्रीनगर की डल झील में जलस्तर बढ़ते हुए पूरे शहर में फैल गया।
चारों ओर हाहाकार मचा था
रविने बताया कि नजरों के सामने ही भवन गिर रहे थे, बिजली के पोल गिरते हुए देखे हैं। सबसे ज्यादा समस्या तो तब हुई जब श्रीनगर पूरे में पानी फैल गया और चारों ओर हाहाकार मच गया। लोग अपनी जान बचाने के लिए परेशान हो गए। लोगों को अपनी जान से ज्यादा परवाह अपने परिजनों और घर के बच्चों को बचाने को लेकर थी। शनिवार को सुबह ही सेना के जवानों ने बताया कि उन्हें दिल्ली ले जाया जाएगा। इसके बाद ही काफी हद तक लोगों को सुकून महसूस हुआ। रविवार को सुबह ही विशेष प्लेन से कई लोगों सहित दिल्ली पहुंचे और सोमवार को बांसवाड़ा में पहुंचे।
मां ने मांग रखी थी मन्नतें
दूसरीओर बांसवाड़ा में अपने बेटे के सकुशल लौटने को लेकर रवि की मां ने कई मन्नतें मांग रखी थी। अब सकुशल लौट आया तो ईश्वर को नमन करते हाथ नहीं थक रहे। हालांकि रवि ने बताया कि एक माह बाद जब माहौल ठीक हाेगा, तो वह पुन: जम्मू के लिए रवाना हो जाएगा। अभी पढ़ाई पूरी करने जाना है।
रवि मीणा
सेना ने निकालकर लद्दाख पहुंचाया
रविके साथ करीब 600 से ज्यादा विद्यार्थी थे, जिन्हें आर्