बांसवाड़ा. कुशलबाग मैदान में दशहरा मेले की शुरुआत भले ही 25 सितंबर से होनी हो, लेकिन नगर परिषद और संबंधित अनुभागों में फैले भ्रष्टाचार की बानगी अभी से ही होने लगी है। एक मामले का खुलासा हाेने के बाद एक ओर जहां नगर परिषद में हलचल मची हुई तो दूसरी ओर शहर में इस बात की चर्चा है कि आखिर फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी कैसे हो गया। इस मामले को लेकर जब झूले लगाने वाले कर्मचारियों से बातचीत करने का प्रयास किया, तो उन्होंने कहा कि हमारे मालिक की साहब से बात हो गई है। अब यह सवालों के घेरे में है कि झूला लगाने वाले लाेगों की बात किस अफसर से हुई है और क्या बात हुई है।
गौरतलब है कि दशहरा मेले में लगने वाले झूले को लेकर नगर परिषद के पत्र के आधार पर भी सार्वजनिक निर्माण विभाग के एईएन ने लगाने से पहले ही फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी कर दिए। हैरत की बात तो यह भी है कि प्रशासन केे उपखंड अधिकारी ने आदेश जारी कर फिटनेस प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। हालांकि सवाल तो यह उठने चाहिए थे कि झूले लगने से पहले प्रमाण-पत्र जारी कैसे हुए।
आखिर खेल क्या: दूसरी ओर मौत के कुएं को लेकर अब तक लगाए गए मेले में एक अजीब बात सामने आती रही है। सवाल यही है कि क्या इस बार भी ऐसा ही होगा। मेला शुरू होने के दौरान एक बार प्रशासन की ओर से मौत के कुएं पर पाबंदी लगाई जाती है, क्योंकि तब प्रशासन को जनहानि का खतरा लगता है, लेकिन दो से चार दिन के बाद शर्तों के आधार पर स्वीकृति दी जाती है। आखिर इसके पीछे खेल क्या है। यह अब तक अंधेरे में ही है।
शहर में चर्चा, तो अफसर भी चुप: मेले में झूले से लगाए जा रहे उपकरणों को पूरी तरह से लगाए जाने से पहले ही फिटनेस सर्टिफिकेट जारी होने को लेकर काफी चर्चा रही। यहां तक कि नगर परिषद से जुड़े कर्मचारी भी इस मामले में बात करते नजर आए। कई लोगों ने तो नगर परिषद के खिलाफ एसीबी जांच की बात कह दी। इस पूरे मामले को लेकर आयुक्त नगर परिषद से तीन बार बातचीत करने का प्रयास किया, लेकिन उनके द्वारा
मोबाइल कॉल रिसीव नहीं किया गया।