बांसवाड़ा। शहर की सड़कों के दो तरह के हाल हैं। एक तो सड़कों पर गड्ढों के अंबार लगे हैं तो दूसरी ओर सड़क पर ही आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा हुआ है। वाहनचालक गड्ढों से बचने जाए तो पशुओं से टकराने का डर और पशुओं से बच कर निकले तो गड्ढों में गिरने की आशंका रहती है। शहर की ऐसी हालत पर सब जानते हुए भी हमारा प्रशासन पीडब्ल्यूडी और नगर परिषद के सामने बेबस बना हुआ है।
पिछले एक साल से शहर की सड़कों के हालात बहुत ही खराब है। इसके बावजूद हमारा हर अधिकारी इस सड़क से गुजरता है, देखता है और मन मारकर मौन हो जाता है। सवाल यह है कि आखिर प्रशासनिक अफसरों के ऊपर किसका दबाव है कि वह मौन धारण किए हुए हैं। संबंधित विभाग के अफसरों और इंजीनियरों को चेताना तो दूर की बात है, लेकिन सड़क के मामले में कदम उठाना भी मुश्किल नजर आता है।
भास्कर ने चेताया तो कलेक्टर ने दी इंजीनियरों को हिदायत: भास्कर की अोर से चेताने के बाद कलेक्टर केबी गुप्ता ने सड़क के मामले में सख्त रूख अपनाते हुए इंजीनियरों को पाबंद किया। गुप्ता ने पीडब्ल्यूडी केे एसई और अन्य इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि शहर और आसपास की सड़कों को लेकर तत्काल कार्रवाई करें। गुप्ता ने बताया कि एक बार पेचवर्क तुरंत प्रभाव से कराने के निर्देश दिए हैं। विशेषकर आंबामाता मंदिर रोड और कस्टम से लेकर मोहन कॉलोनी के बीच की सड़क को तत्काल सुधारने की बात कही गई है।
बजट आता रहेगा, ठेकेदार से काम तो करवाओ: जो ठेकेदार पीडब्ल्यूडी के बजट और कामकाज पर अपनी आजीविका चलाते हैं, उन ठेकेदार को विभाग पाबंद कर सकता है। लेकिन, इसके लिए विभाग को ही आगे बढ़कर कदम उठाना होगा। हालांकि ऐसा विभाग करने में अपने हाथ पीछे कर रहा है। इसके पीछे कारण कुछ भी हो, लेकिन यह सच है कि इतने गंभीर और तकलीफदेय मसले में विभागीय अनदेखी की वजह से ही शहर की सड़कों के यह हाल बुरे बने हुए हैं। ,
हमारीसड़क की तुलना चंद्र और मंगल ग्रह से: शहर के लोगों ने अपना दर्द वाट्सएप पर कुछ इस तरह से बयान किया है कि हमारे सड़क की तुलना चंद्र और मंगल ग्रह से की है। लोगों ने एक फोटो पोस्ट किया है, जिस में एक ओर चंद्र और मंगल ग्रह की तस्वीरें है तो दूसरी ओर शहर की सड़क की तस्वीर है। चंद्र और मंगल ग्रह पर जो गड्ढे नजर आते हैं, ठीक वैसे ही गड्ढे शहर की सड़कों के हैं।
(आवारा पशुओं ने बिगाड़ी शहर की ट्रैफिक व्यवस्था। हर रोज इन पशुओं से भी दुर्घटनाएं हो रही हैं।)