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जो सरपंच निलंबित थे, उनके परिजन भी बन गए सरपंच

6 वर्ष पहले
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भास्कर न्यूज | बांसवाड़ा/आनंदपुरी

राज्यसरकार ने करीब 4 माह पूर्व आनंदपुरी क्षेत्र के 11 सरपंचों को फर्जीवाड़े को लेकर निलंबित कर दिया था। बाद में मनरेगा की जांच में इन लोगों पर लाखों रुपए की वसूली निकली थी। लेकिन पंचायतीराज चुनाव में इन्हीं सरपंचों के परिजन जीत गए। हालात यह है कि सरकार ने निलंबित कर दिया तो क्या हुआ, सरपंच तो हमारे ही बने हैं। इनमें किसी की प|ी तो किसी की सौतन, किसी की बेटी तो किसी के भाई की बहू को मौका मिल गया है। इसके पीछे पंचायत समिति आनंदपुरी की बड़ी लापरवाही सामने आई है। अब तक इन सरपंचों से तो वसूली हुई है और ही पंचायत समिति की ओर से इनके बारे में कोई भी रिपोर्ट निर्वाचन विभाग को दी गई है। कुछ दिन पूर्व ही विकास अधिकारी ने इस बात की पुष्टि की थी कि वसूली कर ली गई है, जबकि उन्हीं के लेखाधिकारी ने इसका खंडन कर दिया था कि नोटिस जारी किया है। अब बीडीओ पारसमल का कहना है कि वसूली नहीं हुई है।

बकायावसूली नहीं, तो परिजनों ने कैसे लड़ लिया चुनाव : सबसेबड़ा सवाल यहीं है कि जब पंचायत समिति ने वसूली नहीं की है, तो निलंबित सरपंचों के परिजनों से चुनाव कैसे लड़ लिया। निर्वाचन विभाग की गाइडलाइन के मुताबिक तो एक ही परिवार का सदस्य तभी चुनाव लड़ सकता था, जब वसूली निकल रही हो और जमा करने के बाद एनओसी दी जाए। बताया जा रहा है कि राजनीतिक दबाव के चलते पंचायत समिति मौन रही। इसी वजह से वसूली भी नहीं हुई और आरोपियों के परिजनों ने चुनाव लड़कर जीत दर्ज कर ली।

कोर्टका स्टे केवल यथावत के लिए था : इसपूरे प्रकरण में एक बात यह भी सामने आई थी कि कोर्ट ने स्टे दे दिया है। लेकिन यहां यह जानना बहुत ही जरूरी है कि कोर्ट ने स्टे इस बात का दिया था कि उनका पद यथावत रहे। जांच को लेकर किसी भी प्रकार से स्टे नहीं दिया था। संभव है कि पंचायत समिति ने इसी बात को ध्यान में रखते हुए चुनाव से पहले कोई कार्रवाई नहीं की। बीडीओ पारसमल ने केवल इतना ही बताया कि वसूली बकाया है और सभी को नोटिस दे दिए हैं। सवाल यह है कि चुनाव हो चुके, क्या अब वसूली की राशि देंगे।

{ग्राम पंचायत - निलंबित सरपंच - निर्वाचित - संबंध

{छाजा -हरीश देवतरा - गीतादेवी - प|ी

{चांदरवाड़ा-अनिलडामोर -लक्ष्मीदेवी - माता

{कानेला-संतोषपटेल - चंपादेवी -भाई की प|ी

{काजलिया-रमेश -अनिता - बेटी

{रतनपुरा-हवजीमालवीया - करमा- प|ी

{बरजडिय़ा-रमेश पारगी- ललिता पारगी - प|ी

{सुंद्राव -कंकूदेवी -शांतिदेवी - सौतन

{भलेर भोदर - इना पटेल -रीना पटेल - पारिवारिक

{नाहरपुरा -इंदिरा खांट - चुनाव मैदान से बाहर रही

{मुंदरी -धनीदेवी - पारिवारिक सदस्य ने चुनाव लड़ा, लेकिन हार

{मड़कोला मोगजी -मणिदेवी - स्वयं ने ही इस ग्राम पंचायत से अलग हुई ठोठिया से चुनाव लड़ा और जीती