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सामूहिक यज्ञोपवीत में दिखा मेले-सरीखा नजारा
बांसवाड़ा। कुशलबागमैदान में आयोजित शिवकथा के दौरान कथावाचक गिरिबापू ने कहा कि व्यसन, वासना और वहम विनाश की जड़ है। जिस व्यक्ति के जीवन में विवेक बुद्धि नहीं होती, उसका जीवन जीते जी नर्क के समान हो जाता है।
बापू ने कहा कि अध्यात्म शक्ति ही भारत की पहचान है और सांम्प्रदायिक बिखराव 21वीं सदी की सबसे चिंताजनक समस्या है। उन्होंने शिव-पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाया गया। श्रद्धालुओं का आह्वान किया कि वे जीवन में कदम-कदम पर विवेक खोए। गिरि बापू ने वैवाहिक आयोजनों में फिजुलखर्ची बंद करने और बालिका संरक्षण और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नवदुर्गा पूजक देश में अगर बेटी बचाओ अभियान चलाना पड़े तो इससे दुर्भाग्यजनक स्थिति नहीं हो सकती। उस पिता का जीवन अधूरा है, जिसके आंगन में बेटी की अठखेलियां नहीं है। कथा के दौरान बापू ने कन्या भ्रूण हत्या के प्रति सावधान किया। उन्होंने बहनों का आह्वान किया कि वे रक्षाबंधन के दिन अपने भाइयों से दक्षिणा में मुद्रा अथवा कोई भेंट मांगे, अपितु किसी व्यसन के शिकार हैं तो उसे त्याग देने का संकल्प दिलाए।
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व्यसन, वासना और वहम विनाश की जड़ : गिरिबापू
शिवकथा के तहत बुधवार को सामूहिक यज्ञोपवीत कार्यक्रम में मंडप में पूजा-अर्चना करते बटुकों के परिजन।
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