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जब जी चाहा खोल दिया डायलाब तालाब का ओटा

7 वर्ष पहले
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जिसनेजब जी चाहा डायलाब तालाब और नाथेलाव तालाब का ओटा खोलकर कीमती पानी को व्यर्थ बहा दिया। हनुमानजी मंदिर के आगे सुरक्षा के लिए बनाया गया डायलाब तालाब का ओटा अनंत चतुर्दशी के बाद किसी असामाजिक तत्व द्वारा खोलने से डायलाब तालाब का पानी निरंतर व्यर्थ बह रहा है। जिससे अब तालाब में पानी निरंतर कम होता जा रहा है। वहीं, तालाब की सफाई का काम नहीं किए जाने से बदतर होता जा रहा है। तालाब के दूसरे छोर पर स्थित आवासीय कॉलोनियों के घरों से निकलने वाले गंदे पानी की निकासी के लिए निर्मित सीवरेज लाइन के ढक्कन तक अब एक-एक कर गायब होते जा रहे हैं। इस बार उदयपुर संभाग में मुख्यमंत्री सहित राज्य मंत्रिमंडल की यात्रा के बाद महत्वपूर्ण निर्णयों में डायलाब तालाब का चयन झील संरक्षण योजना के तहत किया गया है। साथ ही इस तालाब परिक्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है।

डायलाब तालाब के पानी को फिजूल बहाने का यह क्रम शरारती लोगों की ओर से किया जा रहा है। इस पर अंकुश नहीं है।

तालाबों को किया जा रहा हैं प्रदूषित : इधरकुछ लोगों द्वारा डायलाब, नाथेलाव, राजतालाब, बाईतालाब, कागदी पिकअप वियर, लोधा, तलवाड़ के पातेला तालाब को जानबूझ कर प्रदूषित किया जा रहा है। जबकि ये तालाब गर्मी के माह में मानव और पशुओं के लिए काफी उपयोगी साबित होते हैं। इस ओर नगर परिषद, तहसील कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। इसी कारण तालाबों की जमीन पर अतिक्रमण हो रहे हैं और तालाब अपना स्वरूप खोते जा रहे हैं।