30 फीसदी युवतियों में भी पटवारघर संभालने की दिखी ललक
भास्कर संवाददाता | बांसवाड़ा नवागांव
कर्मचारीचयन बोर्ड के तहत शनिवार को आयोजित पटवार भर्ती परीक्षा में इस बार अभ्यर्थियों में छात्राओं की भी अच्छी खासी उपस्थिति रही। यानी अब छात्राएं भी पटवारघर संभालने को आतुर हैं।
पटवारी बनने के लिए करीब 30 प्रतिशत युवतियों-छात्राओं ने भी परीक्षा दी है।प्रशासन की ओर से जिले में 80 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। इसमें 20 हजार अभ्यर्थी पंजीकृत थे। परीक्षा 17 हजार 364 युवाओं ने दी और इनका प्रतिशत 86.82 प्रतिशत रही। इसके पहले वाले रीट परीक्षा में भी औसत 90 प्रतिशत उपस्थिति रही थी। अधिकारियों की माने तो पिछले दोनों ही परीक्षा में उपस्थिति अब तक की दूसरी परीक्षाओं की तुलना में बेहतर रही है। अनुपस्थित परीक्षार्थियों की संख्या 2 हजार 636 रही। नोडल अधिकारी एडीएम नरेंद्र कोठारी ने बताया कि परीक्षा पूर्णरूप से शांतिपूर्ण रही है।
राजस्थानका जीके कठिन, बाकी सब ठीक : परीक्षार्थियोंसे हुई बातचीत के आधार पर इस परीक्षा में 180 प्रश्न आए थे, जिसमें से राजस्थान का जीके बहुत ही कठिन महसूस किया गया था। इसके साथ ही गणित के प्रश्न भी परीक्षार्थियों को उलझाने वाले थे। इसके अलावा पेपर को सामान्य बताया गया है। हालांकि परीक्षा को लेकर जिन युवकों की अच्छी तैयारियां थी, उनके लिए पेपर काफी हद तक अच्छा था।
पटवारी बनना ख्वाब जैसा
^पटवारीबनना एक ख्वाब जैसा है। यदि इसमें चयन होता है, तो ठीक, अन्यथा दूसरी कोई परीक्षा फिर देंगे। वैसे गांवों में पटवारियों का काम चुनौतीपूर्ण होता है। सारा जमीनी वर्क पटवारियों के जिम्मे है। -भगवती सलाड़िया, परीक्षार्थी
चुनौती स्वीकार करेंगी
^यहपहली परीक्षा थी, जिसमें पटवारी बनने की उम्मीद ली हुई थी। पेपर अच्छा रहा है अौर उम्मीद है कि इसमें चयन होगा। यदि पटवारी बन गई तो जो भी चुनौतियां होगी, उसे स्वीकार करेंगी। -शीतल कुमारी, परीक्षार्थी
छात्राएं बोली - हम पटवारी क्यों नहीं हो सकती
परीक्षादेने के लिए आई छात्राओं-युवतियों का कहना है कि जब महिलाएं आईपीएस और आईएएस बन सकती हैं तो हम पटवारी क्यों नहीं बनती। सामान्य तौर पर पटवारी के प्रति महिलाओं का रुझान कम रहता है, लेकिन यह परीक्षा इसका प्रमाण है कि अब इस क्षेत्र में भी महिलाएं आगे रही हैं।
विकलांगता आड़े नहीं आएगी
^मैंनिशक्त हूं, लेकिन यदि पटवारी बन गया तो मेरी विकलांगता इस काम में कहीं पर भी आड़े नहीं आएगी। मैं हौसले से जीता हूं और काम करता हूं। परीक्षा अच्छी रही है। - विजयसिंहसिसोदिया
गोविंद गुरु कॉलेज में पटवारी की परीक्षा देकर बाहर निकलते अभ्यर्थी।