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सात साल के बच्चे के पेट में घुसा सरिया, 3 दिन तक मौत से लड़ा, आखिर थम गई सांसें

5 वर्ष पहले
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खेलनेके दौरान 7 साल के मासूम के पेट में लोहे का सरिया घुस गया। सरिया शरीर में इतना भीतर तक चला गया कि बच्चे के पेट की आंतें बाहर निकल आई, बावजूद बच्चे की सांसें चलती रही। परिजन उसे एमजी अस्पताल लेकर आए, जहां बच्चे ने तीन दिन तक मौत से संघर्ष किया, लेकिन रविवार को उसकी सांसें थम गई।

घटना सदर क्षेत्र के सागा गांव में हुआ। नादरामाल गांव में रहने वाला अज्जू मईड़ा (7) पुत्र छगन मईड़ा सागा गांव में अपने पिता के मामा के घर गया हुआ था, जहां खेलने के दौरान उसके पेट में लोहे का सरिया घुस गया था।

भर्तीकरने से डॉक्टराें ने भी कर दिया था मना

अज्जूको जब परिजन एमजी अस्पताल लेकर आए तो डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत देखते हुए तुरंत बाहर ले जाने के लिए कहा था, लेकिन परिजनों ने आर्थिक स्थिति ठीक होने का हवाला देकर ऑपरेशन यहीं करने की विनती की। आखिर डॉक्टरों की टीम ने बच्चे का ऑपरेशन शुरू किया और सफल भी रहा। तीन दिन तक बच्चा सामान्य हालत में भर्ती रहा, लेकिन रविवार को उसने दम तोड़ दिया।

लापरवाहीका आरोप लगाया, किया हंगामा

अज्जूकी मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टर पर बच्चे की जांच में लापरवाही के आरोप लगाते हुए हंगामा खड़ा कर दिया। सूचना पाकर कोतवाल ने परिजनों से समझाइश की, लेकिन परिजन अड़ गए कि डॉक्टर की लापरवाही से बच्चे की मौत हुई है। एमजी अस्पताल की मोर्चरी के बाहर कोतवाल के साथ सब इंस्पेक्टर लालसिंह, पीएमओ डॉ. वीके जैन, नर्सिंग अधीक्षक शंकरलाल यादव ने काफी देर तक समझाइश की, लेकिन परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ पुलिस को जांच में लापरवाही बरतने की शिकायत दर्ज कराई। बाद में पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को दे दिया।

दोपहरमें सांस लेने की बढ़ गई थी तकलीफ

दोपहरमें अज्जू को सांस लेने में परेशानी हुई। इस पर डॉक्टर आई और पूरी जांच की। कुछ इंजेक्शन देकर चली गई। इसके करीब एक घंटे बाद अज्जू ने दम तोड़ दिया। परिजनों का आरोप है कि जिस डॉक्टर ने बच्चे की जांच की, उसने अज्जू का पेट जोर से दबाया, जबकि उसका पेट का ऑपरेशन हुआ था। इससे अज्जू को सांस लेने की परेशानी बढ़ गई और उसकी मौत हो गई। इस पर परिजनों ने हंगामा खड़ा कर दिया।

इकलौताबेटा था अज्जू

खेतीकरके घर चलाने वाले पिता छगन ने बताया कि अज्जू उनका इकलौता बेटा था। उसकी एक छोटी बहन भी है। अज्जू की मां की आंखाें में तो बेटे का इंतजार ही नजर रहा था। उसके मुंह से बस यही निकल रहा था कि अज्जू तू वापस जा।

मृतक अज्जू।

यहां मोर्चरी के बाहर जब परिजन जब डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगा रहे थे, तब कोतवाल ने उन्हें कहा कि डॉक्टरों ने पहले ही आपसे बच्चे को बाहर ले जाने के लिए कहा था, आपने ही ऑपरेशन के लिए जिद की। इसके बाद बच्चे की मौत पर आप डॉक्टर काे दोषी कहोगेे तो फिर कोई डॉक्टर मरीज को हाथ नहीं लगाएगा। परिजनों ने कहा कि तीन दिन तक बच्चा ठीक था, डॉक्टर के पेट दबाने के बाद बच्चा मारा। पीएमओ डॉ. जैन ने भी परिजनों को समझाया।

एमजी अस्पताल में परिजनों से समझाइश करते पुलिसकर्मी और पीएमओ।

बच्चे का ऑपरेशन करने वाली जूनियर सर्जन डॉ. वंदना अग्रवाल ने बताया कि बच्चे के परिजनों को पहले ही बाहर ले जाने के लिए कहा था। इस पर उन्होंने जनप्रतिनिधि को फोनकर ऑपरेशन के लिए बात करानी चाही। उन्होंने इसके लिए लिखकर भी दिया। मैंने पूरी कोशिश कर ऑपरेशन किया, वह सफल भी हुआ। तीन दिन तक बच्चा सामान्य रहा, लेकिन कई बार हादसे में शरीर के अंदर इंफेक्शन हो जाता है। कुछ रिकवर हो जाते हैं, कुछ नहीं हो पाते। अज्जू के पेट में इंफेक्शन भी हो सकता है। इससे उसे सांस लेने में तकलीफ हुई हो और उसकी मौत हो गई हो। हमारा काम मरीज की जान बचाना है, जान लेना नहीं और हम पूरी ईमानदारी के साथ काम करते हैं।

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