पुलिस की नहीं सुनती, कलेक्टर के कहते ही अतिक्रमण हटाए
एसपीके आदेश पर ट्रैफिक पुलिस ने शहर में अतिक्रमण निरोधक कार्रवाई की थी। दिसंबर के अंतिम सप्ताह में ठेले-सब्जी वालों और दुकानों के आगे सामान फैलाने वालों को पुलिस ने पाबंद भी किया, लेकिन नगर परिषद ने तब पुलिस काे साथ देने की जगह अंगूठा दिखा दिया था।
नगर परिषद में पार्षद से लेकर नेताओं के दबाव गए और पुलिस की मुहिम 7 दिन बाद थम गई। अब सोमवार को जिला कलेक्टर के कहते ही उदयपुर रोड पर 2 घंटे में अतिक्रमण हटा दिए। अब तक अपने दफ्तर में भी कम बैठने वाले और नगर परिषद के कामकाज में रुचि नहीं लेने वाले एक्सईएन और कार्यवाहक आयुक्त तरुण सिन्हा पहले बार उदयपुर रोड पर मोहन कॉलोनी सर्किल से महाराणा प्रताप सर्किल तक सड़क पर विभागीय अतिक्रमण निरोधक कार्रवाई का जायजा लेते देखे गए।
वे माही कॉलोनी के सामने अतिक्रमण हटाने के दौरान एईएन प्रभुलाल भाबोर और कमल नयन आचार्य के साथ पहुंचे। उन्होंने निरीक्षक जाहिद अहमद और नरेश मेहता को सड़क के दोनों किनारों पर एक भी अतिक्रमण नजर नहीं आने के दिशा-निर्देश दिए। इस दौरान माही परियोजना के पुराने कर्मचारियों ने कहा साहब, ये केबिन तो प्याऊ है, जिस पर सिन्हा ने कहा जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के साफ आदेश हैं कि अतिक्रमण हटा दिया जाए। अतिक्रमण हटाना कितने दिनों तक चलेगा, इस पर उन्होंने कहा कि अभी ये तय नहीं है।
क्यापुराने नए बस स्टैंड से हटाएंगे गुमटियां
कलेक्टरके आदेश पर सोमवार को उदयपुर रोड पर अतिक्रमण हटाना नगर परिषद द्वारा पुलिस दल की मदद से प्रारंभ किया गया। जिसके तहत माही परियोजना कार्यालय के बाहर लारियाें वाले केबिन तो हटा दिए, लेकिन कुछ स्थानों को छोड़ दिया गया, जिसमें नूतन स्कूल के समीप का क्षेत्र और भवन एवं दाईं मुख्य नहर के बाहर स्थित ताला लगी तथा कथित प्याऊ वाले केबिन को नहीं हटाया गया है। चारदीवारी के बाहर कभी स्वायत्तशासन विभाग के प्रमुख शासन सचिव के आने से एक दिन पूर्व सभी गुमटियां हटा दी गई थीं, वहीं आज सब्जी और फल विक्रेताओं की लारियां लगती हैं। नगर परिषद के पूर्व बोर्ड के कार्यकाल में नए और पुराने बस स्टैंड के अलावा दाहोद रोड के क्षेत्राें में सड़क पर अवैध गुमटियों पर लाल रंग से क्राॅस के निशान तो लगाए थे लेकिन अतिक्रमण नहीं हटाए गए थे।
यातायात सप्ताह के दौरान पुलिस अधीक्षक के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई यातायात पुलिस ने प्रारंभ की थी, जिसके तहत लारियां और सड़क पर बैठकर सब्जी बेचने वालों को हटाया गया था। इस कार्रवाई में नगर परिषद प्रशासन ने कोई रुचि नहीं दिखाई, जिस वजह से यातायात सप्ताह तक ही अतिक्रमण हटाना जैसे-तैसे चला और बाद में वही बेतरतीब वाले हालात हो गए। शहरवासी भी कहने लग गए थे कि नगर परिषद का काम पुलिस कर रही है। यदि उस समय नगर परिषद प्रशासन ने साथ दिया होता तो पाला रोड बाल उद्यान और व्यावसायिक दृष्टि से निर्मित कागदी कॉम्पलेक्स खाली करवाया जा सकता था, जिससे खाली पड़ी सब्जीमंडियां आबाद हो जाती।
जिला कलेक्टर ने आबादी क्षेत्रों में रेती, पत्थरों और भारी माल से भरे वाहनों को खड़े नहीं रखने के आदेश दिए हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद महाराणा प्रताप सर्किल, शिवकॉलोनी, लिंक रोड, डूंगरपुर रोड पर अवैध तरीके से खनन कर रेती-पत्थर लेकर आने वाले डंपर चालक संचालक बेतरतीब ढंग से सड़क किनारे वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे सड़क पर लोगों और वाहनों का अावागमन खासा असुरक्षित हो जाता है। इन्हें हटाने में या पाबंद करने में नगर परिषद ने कोई रुचि नहीं ली।
सोमवार को कलेक्टर के आदेश पर नूतन स्कूल के पास से अतिक्रमण हटाते नगर परषद के कर्मचारी। लगभग 2 घंटे में सड़क किनारे से अतिक्रमण हटा दिया।