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मेगा हाइवे पर हादसों के संबंध में बाड़मेर एसपी सहित तीन संस्थाओं से मांगा जवाब

5 वर्ष पहले
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राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोविंद माथुर निर्मलजीत कौर की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए फलौदी-रामजी का गोल तक मेगा हाइवे पर दुर्घटना रोकने के इंतजाम नहीं होने के मामले में नेशनल हाइवे ऑथोरिटी आॅफ इंडिया, रिडकोर तथा बाड़मेर पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है। याचिकाकर्ता जयकिशन की ओर से अधिवक्ता हापूराम विश्नोई ने जनहित याचिका दायर कर कोर्ट को बताया कि आरटीआई के तहत बालोतरा, पचपदरा, सिणधरी, गुडामालानी तथा रागेश्वरी थाने से मिली जानकारी के अनुसार पिछले पांच साल में फलौदी से रामजी का गोल तक के हाइवे पर 350 दुर्घटनाएं हुई, जिसमें 400 मौतें हुई तथा 600 जने घायल हुए हैं।

अधिवक्ता विश्नोई ने बताया कि दुर्घटना के बाद लोगों निर्माण एजेंसी रिडकोर ने मनमर्जी से जगह-जगह स्पीड ब्रेकर बना दिए हैं, जिससे और दुर्घटनाएं होने की आशंका गहरा गई है। इसके अलावा टोल टैक्स वसूलने के बावजूद रोड की क्वालिटी दुरुस्त नहीं है, जगह-जगह सड़क खराब हो रही है, जिसकी मरम्मत की जरूरत है। अधिवक्ता ने दैनिक भास्कर में ‘मौत का दूसरा नाम है मेगा हाइवे’ शीर्षक से प्रकाशित समाचार की प्रति भी पेश की। खंडपीठ ने नेशनल अथॉरिटी ऑफ इंडिया, रिडकोर एजेंसी तथा बाड़मेर पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब-तलब किया है तथा अगली सुनवाई 17 मार्च मुकर्रर की है।

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