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‘परिषद काम नहीं कर सकता तो ये नौटंकी बंद करे’

5 वर्ष पहले
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राज्यसरकार की ओर से चलाई जा रही भामाशाह योजना को लेकर भले ही मुख्यमंत्री स्वयं मॉनिटरिंग कर रही हो, लेकिन बाड़मेर में भामाशाह योजना भगवान भरोसे है।

सरकारी खर्च पर नगर परिषद क्षेत्र में भामाशाह कार्ड बनने के लिए शिविर लगाए जा रहे है, लेकिन शिविर में टेंट में बैठने के लिए नगर परिषद कार्मिक नजर नहीं आते है। वार्ड संख्या 18 में मंगलवार को भामाशाह शिविर था, दिनभर में एक भी भामाशाह कार्ड नहीं बना। नगर परिषद से एकमात्र बाबू ही शिविर में पहुंचा था। आखिरकार शाम तक इंतजार कर लोगों में गुस्सा फूट गया। लोगों ने टेंट उखाड़ नगर परिषद के खिलाफ आक्रोश जताते हुए भामाशाह शिविर को बंद करवा दिया। लोगों ने कहा कि नगर परिषद के पास कार्मिक नहीं है, तो ये नौटंकी बंद करें।

पार्षद दिलीपसिंह गोगादे ने बताया कि मंगलवार को वार्ड संख्या 18 में भामाशाह शिविर में एक भी भामाशाह कार्ड पंजीयन नहीं हुआ। जबकि शिविर का उद्देश्य भामाशाह कार्ड, आधार कार्ड, बैंक खाते खोलना था। शिविर में नगर परिषद से केवल एक ही कार्मिक पहुंचा। लोग शिविर में पहुंचे, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। आयुक्त श्रवण विश्नोई को कई फोन किए, लेकिन कोई कार्मिक को नहीं भेजा। परिषद ने जो शिविर प्रभारी नियुक्त कर रखा था, उसका फोन भी स्विच ऑफ था।

जनता चार-पांच घंटे तक भामाशाह कार्ड बनाने के लिए इंतजार करती रही। अधिकारियों की मॉनिटरिंग नहीं होने से महत्ती योजना की धज्जियां उड़ रही है। जब शिविर में जनता के कोई काम नहीं हुए तो आक्रोशित लोगों ने टेंट उखाड़ा और शिविर को बंद करवा दिया। इस पर कार्मिक और कम्प्यूटर ऑपरेटर प्रिंटर, कम्प्यूटर बंद कर ले गए। टेंट वाले को लोगों ने फोन किया और टेंट ले जाने के लिए कहा। इतनी बड़ी घटना के बावजूद नगर परिषद से कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।

बाड़मेर. भामाशाह शिविर को बंद करवाने के लिए टेंट हटाते पार्षद दिलीपसिंह।

शिविर में कर्मचारी उपस्थित नहीं होने के कारण नाराज मौहल्लेवासी शिविर का टेंट खोलते हुए।

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