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पढ़ाई के साथ अभिव्यक्ति की क्षमता होना जरूरी : विश्नोई

5 वर्ष पहले
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पहले दिन चार टीमों के बीच कबड‌्डी मैच, दो एमबीसी कन्या महाविद्यालय ने जीते

बाड़मेर | आशु-भाषणऔर लघु लेख प्रतियोगिताओं से विद्यार्थी की आंतरिक सृजन क्षमता निखर कर सामने आती है। विद्यार्थियों को प्रत्येक गतिविधियों में उत्साह से भाग लेना चाहिए। पढ़ाई के साथ-साथ अभिवयक्ति की क्षमता का होना अति आवश्यक है।

ये विचार पीजी कॉलेज में आयोजित समग्र व्यक्तित्व विकास कार्यशाला के रंगारंग समापन समारोह में मुख्य अतिथि एडीएम ओ.पी विश्नोई ने व्यक्त किए। उन्होंने वर्तमान में धैर्य और आत्मविश्वास को सर्वोपरि कौशल बताया। प्रधान पुष्पा चौधरी ने दृढ़ निश्चय और ईमानदारी से कार्य करने की प्रेरणा देकर छात्रों को प्रोत्साहित किया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ.बी.डी तातेड़ ने दृष्टांतों से जीवन कौशल के विभिन्न पक्षों को उभारा। कहानीकार किशोर चौधरी ने कहा कि भीतर से बाहर की ओर खुलती हुई दुनिया अच्छी होती है, हमेशा मनुष्य वो लम्हे फिर जीना चाहता हैं, जिनसे यादें जुड़ी होती है। कॉलेज लाइफ को जी भर कर जीना चाहिए।

प्राचार्य डॉ.विमला आर्य ने छुपी हुई प्रतिभा को उभारने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। उप प्राचार्य डॉ.ललिता मेहता ने मुश्किलों से डट कर मुकाबला करने तथा कॅरिअर के विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी दी। द्वितीय तकनीकी सत्र को मोटिवेटर आफताब अजीम ने कौशल विकास के नाम समर्पित करते हुए कहा कि जब सीढ़ी पर कदम रखते हैं तो पता होता है कि छत पर जाना है, वैसे ही जीवन की दिशा पता होनी चाहिए। जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए जीवन को संवेदना के साथ जीना चाहिए। समापन सत्र का संचालन कार्यशाला संयोजक डॉ.आदर्श किशोर ने किया। आभार वर्कशॉप के सहयोगी प्रेमसिंह राजपुरोहित ने व्यक्त किया। इस कार्यशाला में 148 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

बाड़मेर. पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मौजूद छात्राएं।

बाड़मेर. एमबीसी कॉलेज में कबड्डी का उद्‌घाटन मैच खेलती छात्राएं

बाड़मेर. प्राचार्य खिलाड़ियों को शपथ दिलाते हुए

नृत्य करती छात्रा।

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