8 दिन से प्लांट बंद, 13.60 लाख यूनिट बिजली का नहीं हुआ उत्पादन
गिरलपॉवर प्लांट संचालन का ठेका लेने वाली पीसीपी कंपनी ने काम करने से हाथ खड़े कर दिए है। बीते आठ दिन से प्लांट बंद होने से 13 लाख 60 हजार यूनिट बिजली उत्पादन ठप रहा। इससे सरकार को 34 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा। नई कंपनी को टेंडर जारी करने तक प्लांट बंद रहेगा। नतीजतन बिजली उत्पादन बंद रहने से रोजाना करीब सवा चार लाख रुपए का घाटा हो रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में प्लांट संचालन का टेंडर पीसीपी कंपनी को दिया गया। कंपनी प्रतिनिधियों ने प्लांट का अवलोकन करने के बाद काम प्रारंभ करने पर सहमति दी थी। इसके बाद कंपनी ने प्लांट चलाना घाटे का सौदा समझ काम करने से मना कर दिया है।
गिरल पॉवर प्लांट में 125-125 मेगावाट की दो इकाइयां स्थापित है। गिरल पॉवर प्लांट थुंबली की 125 मेगावाट की पहली इकाई मेंटेनेंस के अभाव में स्थाई रूप से बंद है। इसके मेंटेनेंस के लिए 50 करोड़ रुपए के बजट की जरूरत है, लेकिन सरकार ने पहले से 850 करोड़ के घाटे में चल रहे प्लांट को बजट जारी करने से मना कर दिया। नतीजतन दूसरी इकाई से बिजली उत्पादन बीते आठ दिन से ठप है। गिरल पॉवर प्लांट में तकनीशियन गैर तकनीशियन कर्मचारी उपलब्ध करवाने वाली ऑपरेशनल एनर्जी ग्रुप इंडिया प्रा.लि. की टेंडर अवधि 31 अक्टूबर 2015 को समाप्त हो गई। लेकिन टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के अभाव में उक्त कंपनी को तीन माह का अतिरिक्त समय दिया गया।
हाल ही में पीसीपी प्रा.लि.को प्लांट संचालन कर्मचारी उपलब्ध करवाने का टेंडर जारी किया गया। प्लांट में कार्यरत 350 अस्थाई कर्मचारियों से करार नहीं होने से धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया। इस बीच कंपनी ने एक माह का समय मांग लिया। बीत आठ दिन से प्लांट बंद होने से हो रहे नुकसान को देखते हुए प्लांट प्रशासन ने कंपनी प्रतिनिधियों से वार्ता करते हुए काम शुरू करने के निर्देश दिए। लेकिन कंपनी से काम करने से मना कर दिया है। इस स्थिति में दुबारा टेंडर जारी होने तक प्लांट से बिजली उत्पादन प्रारंभ होने पर संशय है।
आक्रोशित युवाओं ने चीफ इंजीनियर का पुतला फूंका
विद्यतुउत्पादन अस्थाई कर्मचारी संघ के बैनर तले सोमवार को आठवें दिन धरना जारी रहा। प्लांट के बाहर हटाए गए कर्मचारियों ने पुन: राेजगार पर लगाने की मांग को लेकर गिरल प्लांट के चीफ इंजीनियर का पुतला फूंककर विरोध जताया। कर्मचारी संघ अध्यक्ष नरपतसिंह चावड़ा ने बताया कि 350 अस्थाई कर्मचारियों को प्लांट में लगाने तक आंदोलन जारी रहेगा।
फिर प्लांट पर संकट
पहलेसे घाटे में चल रहे गिरल पॉवर प्लांट थुंबली पर फिर से संकट खड़ा हो गया है। प्लांट संचालन ठेका लेने वाली कंपनी ने काम करने से मना कर दिया है। इस स्थिति में प्लांट का कामकाज बाधित रहेगा। फिलहाल कंपनी ने विकल्प नहीं ढूंढा है। दूसरी कंपनी को टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने में वक्त लगेगा। इसके चलते प्लांट के साथ अस्थाई कर्मचारियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
8 दिन में प्लांट को 34 लाख की आय का नुकसान
गिरलपॉवर प्लांट से रोजाना करीब 1 लाख 70 हजार यूनिट बिजली उत्पादन होता है। इस हिसाब से 8 दिन प्लांट बंद रहने से 13 लाख 60 हजार यूनिट बिजली उत्पादन प्रभावित रहा। प्रति यूनिट 2.50 रुपए दर के अनुसार आठ दिन तक अगर बिजली उत्पादन होता तो प्लांट को 34 लाख रुपए की आय प्राप्त होती।
^पीसीपी प्रा.लि. ने प्लांट संचालन से हाथ खड़े कर दिए है। हालांकि अभी तक मौखिक रूप से जानकारी दी है,लिखित में नहीं दिया है। जल्द ही दूसरी कंपनी को टेंडर देने की प्रक्रिया शुरू करेंगे ताकि प्लांट को प्रारंभ किया जा सके। राकेशवर्मा,चीफ इंजीनियर, गिरल प्लांट थुंबली।
बाड़मेर. गिरल प्लांट थुंबली के बाहर चीफ इंजीनियर का पुतला जलाते अस्थाई कर्मचारी।
पीसीपी कंपनी ने संचालन से खड़े किए हाथ