भीलवाड़ा. नगरपरिषद बोर्ड की सोमवार को होने वाली बैठक में 133 करोड़ का बजट पास करने का प्रयास किया जाएगा। पिछली बार बजट 115 करोड़ रुपए का था। मीटिंग सुबह 11 बजे सभा भवन में होगी। मीटिंग में 458 लाख के कार्यों का अनुमोदन किया जाएगा।
पार्षदों का कहना है कि किस मद में कितना पैसा खर्च होगा तथा कहां से कितना पैसा आएगा इसकी एजेंडा में डिटेल जानकारी नहीं है। मीटिंग में 29 बिंदुओं पर चर्चा होगी।
सभापति का टूटे निर्माण, दर्ज हो एफआईआर
जब एक आम आदमी सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर लेता है तो उसका निर्माण टूटता है। अतिक्रमी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है। सभापति द्वारा सैनेटरी गली पर किए निर्माण के मामले में भी ऐसा ही होना चाहिए। वैसे भी पार्षद या चेयरमैन अपनी जमीन पर भी बगैर स्वीकृति निर्माण नहीं कर सकता।
यह तो सरकारी जमीन है। जब अवैध निर्माण होता है तब तो अफसर सोते रहते हैं। अब बोर्ड में प्रस्ताव लाकर रेगुलराइज करवाना चाहते हैं। जब पास हो जाएगा तो कहेंगे कि पार्षदों ने पास किया। हम ऐसा नहीं होने देंगे। बोर्ड बैठक में विरोध करेंगे। अब्दुलसलाम, नेता प्रतिपक्ष, नगर परिषद, भीलवाड़ा
133 करोड़ के बजट पर चर्चा होगी, गायों, गांधी सागर, गंदगी सहित तमाम मुद्दों पर चर्चा और हंगामा संभव
भीलवाड़ा। नगरपरिषद बोर्ड की सोमवार को होने वाली बैठक में अवैध कॉम्पलैक्स सहित कई मुद्दों पर जोरदार हंगामा हो सकता है। कांग्रेस के साथ ही भाजपा पार्षदों ने भी अपने सभापति को घेरने की तैयारी कर ली है।
बैठक में विरोध का सबसे बड़ा मुद्दा परिषद चेयरमैन अनिल बल्दवा के अवैध निर्माण सहित शहर में बने 10 अवैध कॉम्पलैक्सों के नियमन का रहेगा। इन्हें सेटबैक पेनल्टी के नाम पर नियमित करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि अगस्त में होने वाले चुनाव से पहले यह बोर्ड की सोमवार को आखिरी बैठक होगी। इस कारण चेयरमैन इस बैठक में अवैध निर्माण को वैधता की मुहर लगवाना चाह रहे हैं।
हालात यह है कि कहीं कहीं तो बेसमेंट में पिल्लर को ही सेटबैक के नाम पर नियमन किए जाने की तैयारी है। सेटबैक पेनल्टी के नाम पर नियमन का भाजपा के ही उप सभापति दिनेश शर्मा तथा कांग्रेसी पार्षद लगातार विरोध कर रहे हैं। वे इस बैठक में भी विरोध करेंगे।
भाजपा के विरोध का कारण
अपने ही दल के सभापति का विरोध करने की वजह है, छह माह बाद होने वाले आम चुनाव। चुनाव में नगर परिषद में भारी भ्रष्टाचार का मुद्दा बनेगा। भाजपा पार्षदों का मानना है कि परिषद में भ्रष्टाचार को चुनावों में विपरीत असर पड़ेगा, इसलिए वे इसका विरोध दर्ज कराकर अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। दूसरी ओर कांग्रेस भी सदन में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आक्रामक रुख बना रही है, ताकि आने वाले चुनाव में इसका राजनीतिक लाभ लिया जा सके।
बड़ामुद्दा
सभापति का 55.41 वर्ग गज में अतिक्रमण
नगरपरिषद सभापति अनिल बल्दवा का काशीपुरी में प्लॉट नंबर 4 पर मकान बना है। इसके पीछे सेनेटरी गली है, जिस पर उन्होंने अवैध निर्माण कर लिया। इस गली का नियमन किया ही नहीं जा सकता। परिषद की इस 55.41 वर्ग गज स्ट्रिप ऑफ लैंड पर हुए निर्माण के नियमन की तैयारी है। इनके अलावा तीन तीन लोग और हैं, जिनके अवैध निर्माण के नियमन के लिए प्रस्ताव एजेंडा नंबर तीन पर लिया गया है।
पहले कॉम्पलैक्स बनने दिए, अब नियमन कर रहे
शहर में जब अवैध कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स बन रहे थे, तब नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की। अब बोर्ड बैठक में उन्हें नियमित किया जाने का प्रस्ताव है। एजेंडा में 18वें नंबर पर ऐसे कुल 21 प्रस्ताव हैं। ये सभी सेटबैक कवर्ड कर लेने एवं बिना स्वीकृति निर्माण करने पर नियमन के हैं। इनमें से 9 कॉमर्शियल कॉम्पलेक्स हैं। जिनके केवल पिल्लर बने हैं, उन्हें भी नियमित किया जाएगा।
राजस्व अधिकारी को स्ट्रिप ऑफ लैंड विक्रय का प्रस्ताव
परिषद ने राजस्व अधिकारी सत्यनारायण चौधरी सहित नौ व्यक्तियों को आवासीय व्यवसायिक उपयोग के लिए स्ट्रीप ऑफ लैंड बेचने की तैयारी कर ली है। चौधरी ने प|ी शकुंतला के नाम प्लॉट नंबर 7 सुभाष नगर पश्चिम विस्तार के पास 630 वर्गफीट जमीन मांगी है।
स्ट्रिप ऑफ लैंड पर नियमन
ये है नियम : स्ट्रिप ऑफ लैंड बेचने का भी नियम है। नगर परिषद अधिकतम 900 वर्ग फीट तक स्ट्रिप ऑफ लैंड बेच सकती है, बशर्ते वह प्लॉट के सामने हो। साथ ही सड़क और प्लॉट के बीच होनी चाहिए। यदि दाएं-बाएं या साइड में स्ट्रिप ऑफ लैंड है तो उसे नीलामी के जरिये बेचा जा सकता है।
और हो ये रहा है : प्लॉट के सामने हो या पीछे अथवा साइड में परिषद स्ट्रिप ऑफ लैंड को नियमन के जरिये बेचने की तैयारी में है।
कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स का नियमन
ये है नियम : कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स बनाने से पहले आवासीय भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन करवाना होता है। इसके लिए आवेदन नगर परिषद में लगता है। परिषद की सिफारिश सीनियर टाउन प्लानर अजमेर भेजी जाती है। वे भू-उपयोग परिवर्तन की स्वीकृति देते हैं। तब इसका पैसा परिषद में जमा होता है। फिर कॉमर्शियल नक्शा पास होता है, तभी निर्माण किया जा सकता है।
और हो ये रहा : अभी लैंड यूज चेंज हो रहा, परिषद में पैसा जमा हो रहा है। नक्शा पास करवाया जाता है। मनमर्जी अवैध या बिना स्वीकृति निर्माण करो। फिर बोर्ड बैठक में रेगुलराइज करवा लो। इससे परिषद को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
रेगुलराइज करने का करेंगे विरोध
नगरपरिषद अवैध कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स को सेट बैंक पैनल्टी के नाम पर रेगुलराइज करने की तैयारी कर रही है। यह गलत है। हम ऐसा नहीं होने देंगे। बोर्ड बैठक में इस प्रस्ताव का विरोध किया जाएगा। दिनेशशर्मा, उप सभापति, नगर परिषद।
परिषद की कार्यप्रणाली पर संदेह
अवैध कॉमर्शियल कॉम्पलैक्स को रेगुलर करवाने की तैयारी से परिषद की कार्यप्रणाली पर संदेह होता है। हम बोर्ड बैठक में नियमन का विरोध करेंगे। शिवरामखटीक, उप नेता प्रतिपक्ष, नगर परिषद
सुरेंद्र कुमार पुत्र राजमल सुराणा, शास्त्रीनगर: 10 पिलर बेसमेंट में बना रखे हैं।
मधु प|ी ओमप्रकाश काबरा, गांधीनगर: 107.48 वर्गमीटर में बिना स्वीकृति निर्माण के साथ ही सेट में भी निर्माण कर लिया।
किरण पत्नी प्रियंक भदादा, महेशचंद्र पुत्र बंशीलाल विजयवर्गीय, योगेश पुत्र पुरुषोत्तम केडिया, आजाद चौक के पास: 243.68 वर्ग मीटर में बिना स्वीकृति तथा 10.68 वर्ग मीटर में सेट बैक में निर्माण।
मीनल पत्नी पंकज जैन, गाडरी खेड़ा गांधीनगर:58.69 वर्ग मीटर सेटबैक को भी नहीं छोड़ा।
निशांत पुत्र पीसी कोठारी, मियाचंद जी की बावड़ी के सामने: परिषद की स्वीकृति के बगैर निर्माण शुरू कर दिया।
जगदीश चंद्र पुत्र भगवान दास सिंघी, नागौरी गार्डन: 41.80 फीट पर अवैध निर्माण करवा दिया।
ऊंकार पुत्र गुलाब माली, मालियों के नोहरे के पास, नेहरू रोड: कांग्रेस के पूर्व पार्षद ऊंकार माली ने 120.44 वर्गमीटर में कोई मंजूरी नहीं ली और काम करवा लिया।
सतीश, गिरीश, नवीन पुत्र सतपाल, इंद्रा रानी पुत्री हरदयाल रहेजा, काजल रानी पुत्री हरगुन दास कस्तूरी, नीलम रानी पुत्री सुंदरदास रामनानी, गोल प्याऊ चौराहा: शहर के इस पटाखा व्यवसायी ने तीसरी मंजिल पर बिना स्वीकृति 9 पिल्लर बनाए। पिल्लर के आधार पर नियमन किया जा रहा है।
मिश्रीलाल पुत्र सुगनचंद, संजय पुत्र मिश्री लाल अग्रवाल, इंद्रा मार्केट: परिषद से अनुमति लिए बगैर 27.68 वर्गमीटर में निर्माण करवा दिया।
मैसर्स राधेकृष्णा डवलपर्स, पार्टनर कैलाशचंद्र मूंदड़ा, सांगानेर कॉलोनी: कॉम्पलैक्स के साइड में 863.43 वर्ग फीट पर बाउंड्रीवाल बना कर कब्जा कर लिया। अब इसे स्ट्रिप ऑफ लैंड में आवंटन का प्रस्ताव।
छीपा बिल्डिंग पर तीसरी मंजिल सील, गोल प्याऊ पर स्वीकृति क्यों
नपने छीपा बिल्डिंग पर बन रही तीसरी मंजिल का काम गत दिनों रुकवा दिया। मंजिल का रास्ता भी सील कर दिया। कारण बताया, भूखंड मालिक को दी स्वीकृति की अवधि खत्म हो गई। इसके विपरीत गोल प्याऊ चौराहा पर सतपाल पटाखे वाले के कॉम्प्लैक्स में तीसरी मंजिल पर बिना स्वीकृति बने 9 पिल्लरों को नियमित करने की तैयारी है। यह दोहरे मानदंड क्यों?
गांधी सागर की अब तक नहीं ली ठीक से सुध
शहर का गांधी सागर पार्क सड़ांध के कारण शहर के लिए नासूर बन गया है। अब यहां कोई आना पसंद नहीं करता। शास्त्री नगर हरणी महादेव रोड के एरिया से यहां गंदगी बहकर सरोवर में मिलती है। एक दशक में दो करोड़ से ज्यादा खर्च के बावजूद हालात नहीं बदल पाए हैं। बैठक में इसके सुधार पर भी चर्चा किया जाना संभव है।
सुलभ शौचालयों की सफाई दूसरी संस्था को देंगे
परिषद के 22 सुलभ शौचालयों की सफाई नहीं करने वाले संस्था वर्ल्ड सेनिटेशन एंड एन्वायरनमेंट को परिषद ने ब्लैक लिस्ट कर दिया है। इसका काम दूसरी संस्था को देने पर भी मीटिंग में चर्चा होगी।
पट्टों के लिए 3 साल से चक्कर
शहर के किशनावतों की खेड़ी, बीलियाखुर्द ओडों का खेड़ा के लोग स्टेट ग्रांट एक्ट के तहत मिलने वाले पट्टों के लिए आवेदक नगर परिषद के चक्कर काट रहे हैं। अब तीन वर्ष बाद इन्हें पट्टे जारी करने की दिशा में सोमवार नगरपरिषद की बोर्ड मीटिंग में प्रस्ताव रखा जाएगा।